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साहित्यिक मासिक पत्रिका " सोच विचार" का कैण्ट मे हुआ लोकार्पण

वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता की रिपोर्ट
वाराणसी -- कैंट स्थित एक निजी होटल मेडास के सभागार में सोमवार को वाराणसी से प्रकाशित साहित्यिक मासिक पत्रिका "सोच विचार " के बाल साहित्य विशेषांक का लोकार्पण किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल उपस्थित रहे।इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि व्योमेश शुक्ल ने कहा कि बच्चों के लिए लिखना सबसे कठिन है। क्योंकि बच्चा ना दिखावा मानता है,ना ही उपदेश। पंचतंत्र से लेकर दादी, नानी की कहानियां तक हमारी भाषा की असली नीव बच्चों की कल्पना में पड़ी है। आज जब बचपन स्क्रीन की हवाले हो रहा है, तब सोच विचार का पूरा अंक बच्चों को समर्पित करना एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप है। जरूरत है इस बात की है कि यह अंक बड़ों की आलमारी में नहीं, बच्चों के हाथों में पहुंचे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिंदुस्तानी अकादमी प्रयागराज के पूर्व अध्यक्ष डॉ उदय प्रताप सिंह ने कहा की सुबह का जो महत्व दिन के लिए होता है,बाल्य काल का वही जीवन के लिए होता है। विशिष्ट अतिथि डा. दयानिधि मिश्र ने कहा की सोच विचार हमेशा नवोन्मेषी कार्य करता रहा है और यह प्रयास उसी कड़ी का प्रतिफल है। इस अवसर पर दो बाल साहित्यकारों नीलम राकेश (लखनऊ) एवं कामना सिंह (नई दिल्ली) को सेवक साहित्यश्री सम्मान- 2026 से सम्मानित किया गया। इसी कार्य क्रम के दौरान वाराणसी के 11 विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों को सोच विचार विद्यार्थी प्रतिभा सम्मान- 2026 से भी सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में साहित्यिक संघ के मंत्री जितेंद्र नाथ मिश्र ने अतिथियों का स्वागत करते हुए साहित्यिक संघ एवं सोच विचार की भूमिका पर संक्षिप्त रूप से प्रकाश डाला।इस कार्यक्रम का संचालन हिमांशु उपाध्याय ने एवं धन्यवाद ज्ञापित डा. इनदीवर ने किया। इस कार्यक्रम में पत्रिका के लोकार्पण में कामना सिंह, नीलम राकेश, पद्मश्री डॉ उषा यादव, योगेश शुक्ल, डॉ उदय प्रताप सिंह, डॉ. दया निधि मिश्र, डॉ जितेंद्र नाथ मिश्र ने किया। इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रोफेसर श्रद्धानंद, शिव कुमार पराग, डॉ अशोक सिंह, सुरेंद्र बाजपेई, डॉ राम सुधार सिंह, ओम धीरज, वासुदेव ओबेरॉय, नरेंद्र नाथ मिश्र आदि उपस्थित रहे।

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