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रामनगर की रामलीला मे कल हनुमान का सिंधु पार आगमन,लंका दहन

अंजली कुमारी की रिपोर्ट
रामनगर,वाराणसी काशी दीप विजन- समुन्द्र पार करने के लिए हनुमान मैनाक पर्वत पर चढ़ जाते है,जिससे वह धस जाता है.वही विश्राम करके वे समुन्द्र पार करते है.रास्ते में सर्प माता सुरसा उनकी परीक्षा लेने के लिए रास्ता रोककर उन्हें खाना चाहती है.वह कभी सोलह कभी बत्तीस योजन तक मुँह फैलाती है.इसी क्रम में ज़ब वह अपना मुँह सौ योजन फैलाती तब हनुमान उसमे प्रवेश कर तुरंत बाहर आ जाते है.तब सुरसा उन्हें आशीर्वाद देकर चली जाती है. इसके बाद हनुमान का सामना छाया पकड़ने वाली राक्षसी से होता है,उसका संहार कर वे सुवेल गिरी पर चढ़ लंका का सौंदर्य निहारते है.बाद में मच्छर रूप में वे लंका में प्रवेश करते है.जहा उनका सामना लंकिनी से होता है,उसे मारकर वे महल में पहुंचते है और चारों ओर सीता को खोजते है,इस दौरान उनकी भेंट विभीषण से भी होती है.उनसे जानकारी लेकर वे अशोक वाटिका पहुंचते है.उसी समय रावण भी वहा पहुंच कर अपनी कुटिल बातों से सीता को बहुत कष्ट देता है,जिससे वे दुःखी होकर अपना शरीर त्यागने को सोचती है,तभी उनके सामने राम की अंगूठी गिराकर आकाशवाणी रूप में हनुमान सारी बातें सुनाकर प्रकट होते है.ततपश्चात उनसे आज्ञा लेकर,वे वहाँ पेड़ों से फल खाते है और उन्हें उखाड़ फेंकने के साथ ही बहुत उपद्रव करते है.ज़ब रावण को उपद्रव की जानकारी मिलती है तो वह उन्हें पकड़ने के लिए अक्षय कुमार को भेजता है, लेकिन वह मारा जाता है.अंततः मेघनाथ ब्रम्हास्त्र से बाधकर हनुमान को ले जाता है.इसके बाद रावण उनकी पूछ में आग लगवा देता है.तब हनुमान उछल कूद करते हुए पूरी लंका में आग लगा देते है, जिससे धू धू करके पूरी स्वर्ण लंका जल कर खाक हो जाती है.इसके बाद हनुमान सीता से मिलकर,उनकी चुड़ामनी लेकर समुन्द्र पार करते है और अपने साथियो से मिलकर,मधुवन में सुग्रीव से मिलते हुए,राम के पास पहुंचते है.सारी बात जानकर राम उन्हें गले लगा लेते है और उनसे कोई वर मांगने को कहते है.इसी के साथ लीला का विश्राम होता है. आरती का समय रात्रि लगभग साढ़े नौ बजे है.आरती सुग्रीव करते है. यह लीला पम्पासर और लंका क्षेत्र मे होती है.

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