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हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय में साहित्य की उपादेयता शीर्षक पर भाषण प्रतियोगिता संपन्न।जमानिय काशी दीप विजनां। स्थानीय स्टेशन बाजार स्थित हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रांगण में हिंदी विभाग के तत्वावधान में एक साहित्यिक उत्सव का आयोजन हुआ, जिसमें स्नातक (हिंदी) प्रथम वर्ष की छात्राओं ने "साहित्य की उपादेयता" विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में अपनी वाक्पटुता और साहित्यिक चेतना का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. अखिलेश कुमार शर्मा शास्त्री ने किया, जिनके मार्गदर्शन में यह आयोजन साहित्य के प्रति नवीन दृष्टिकोण और उत्साह का प्रतीक बना। प्रारंभ में अंकिता यादव ने साहित्य के वर्तमान परिदृश्य पर अपनी विचारपूर्ण प्रस्तुति दी। उन्होंने साहित्य की सामाजिक प्रासंगिकता और आधुनिक युग में इसके बदलते स्वरूप को रेखांकित करते हुए उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी वाणी में साहित्य के प्रति गहन समझ और संवेदनशीलता झलक रही थी। इसके पश्चात सान्या सिंह ने साहित्य, सिनेमा और संस्कृति के आपसी संबंधों पर अपनी ओजस्वी शैली में विचार व्यक्त किए। उन्होंने साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए सिनेमा के माध्यम से संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उनकी प्रस्तुति में साहित्य और सिनेमा के बीच सेतु स्थापित करने की अनूठी कोशिश थी, जिसने सभी को विचारमंथन के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम की अगली कड़ी में कुमारी चंचल ने वर्तमान साहित्य की रूपरेखा पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने आधुनिक साहित्य में प्रचलित नवीन धाराओं और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उनकी प्रस्तुति में साहित्य की उपादेयता को राष्ट्रीय और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में समझने का प्रयास स्पष्ट था, जिसने उपस्थित श्रोताओं में साहित्य के प्रति नवीन जिज्ञासा जगाई। प्रतियोगिता के समापन समारोह में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. श्रीनिवास सिंह और हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. अखिलेश कुमार शर्मा 'शास्त्री' ने विजेताओं को सम्मानित किया। प्रथम स्थान पर अंकिता यादव, द्वितीय स्थान पर सान्या सिंह और तृतीय स्थान पर कुमारी चंचल ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। तीनों विजेताओं को प्रमाण पत्र और साहित्यिक पुस्तकें भेंट की गईं। प्राचार्य प्रो. श्रीनिवास सिंह ने अपने संबोधन में छात्राओं की साहित्यिक अभिरुचि और बौद्धिक क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा, "साहित्य केवल शब्दों का समूह नहीं, अपितु समाज को दिशा देने वाला एक शक्तिशाली माध्यम है। आज की यह प्रतियोगिता इस बात का साक्ष्य है कि हमारी नई पीढ़ी साहित्य के महत्व को समझ रही है।"हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. अखिलेश कुमार शर्मा शास्त्री ने अपने उद्बोधन में साहित्य की उपादेयता को रेखांकित करते हुए कहा, "साहित्य वह दीपक है जो अंधेरे में भी राह दिखाता है। यह प्रतियोगिता न केवल छात्राओं की प्रतिभा को उजागर करने का अवसर थी, बल्कि साहित्य के प्रति उनकी संवेदनशीलता को भी प्रदर्शित करती है।" इस अवसर पर महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी एवं विभाग हिंदी के सहायक आचार्य डॉ अभिषेक तिवारी जो निःशुल्क नेट कोचिंग की सुविधा छात्र-छात्राओं को प्रदान कर रहे हैं जिसमें हिंदी के अतिरिक्त अन्य विषयों के शिक्षार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। डॉ तिवारी के निर्देशन में कई छात्र छात्राओं ने नेट जे आर एफ में सफलता पाई है। विभाग के सहायक आचार्यगण डॉ अंगद प्रसाद तिवारी डॉ संजय कुमार राय डॉ लालचंद पाल बिपिन कुमार डॉ अमित कुमार आदि अपने अपने स्तर से शिक्षार्थियों के बौद्धिक स्तर को बढ़ाने में लगे हुए हैं। सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया

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