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पूर्वजों को श्राद्ध और पिंडदान से मिलती है। मुक्तिजमानियां। नगर कस्बा बाजार स्थित पक्का बलुआ घाट गंगा नदी के पास पितरों को पिंडदान करने के लिए सैकड़ों लोग अपने लोगों को रीति रिवाज विधि पूर्वक हिंदू परंपरा या धार्मिक विधि के अनुसार ब्राह्मण पुजारियों से पिंडदान कराया। ब्राह्मण पुजारी उद्धव पांडेय ने बताया कि पिंडदान एक गोलाकार पिंड (चावल या जौ के आटे से बना होता है। जो पितरों को भोजन और मोक्ष प्रदान करने के लिए अर्पित किया जाता है। उन्होंने बताया कि पिंड का अर्थ है, गोल आकार का भोजन और 'दान' का अर्थ है देना। और पिंडदान का अर्थ है। पितरों के लिए गोल आकार का भोजन अर्पित करना। पांडेय ने बताया कि पिंडदान के लिए चावल या जौ के आटे को पानी दूध, घी, शहद आदि मिलाकर गोल पिंड बनाए जाते हैं। पितृपक्ष में या गया जैसे पवित्र स्थानों पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को अर्पित किया जाता है। हिंदू धर्म में पिंडदान को पितरों को संतुष्ट करने और उन्हें मोक्ष दिलाने का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। पुजारी ने बताया कि श्राद्ध के दिन में पितरों के लिए खीर, पूड़ी, सब्जी और उनकी कोई मनपसंद चीज बनाई जाती है। और भोजन को गोबर से बने उपले या कंडलों की कोर पर रखकर पितरों को भोग लगाया जाता है। और सीधे हाथ से कोर के दाहिनी तरफ पानी छोड़ा जाता है। इसे ही पिंडदान कहा जाता है। लेकिन कुछ शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध-कर्म में पके हुए चावल, दूध और तिल को मिश्रित करके पिंड बनाए जाते हैं। और उसे सपिंडीकरण कहते हैं। यहां पिंड का अर्थ है। श्राद्ध में पूर्वज़ों के निमित पिंड बनाकर उनसे अपने आने वाले जीवन की शुभेच्छा की प्रार्थना की जाती है। पिंडदान करने वाले को उसके पूर्वजों के आशीर्वाद से संतति, संपत्ति, विद्या और हर प्रकार की सुख-समृद्धि मिलती है। शरीर से मुक्ति पाने के लिए काफी सारे लोगंतिम समय में पक्का बलुआ घाट पहुंचकर और तर्पण करने से वे सीधे पिंडदान के सहारे पूर्वजों को मुक्ति दिलाने के लिए विधि पूर्वक श्राद्ध करते है। मान्यता है। कि पितरों को पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति मिलता है। और पृथ्वीलोको से गमन कर जाते है। और पिंडदान करने से पूर्वजों को मिलता है। शांति यह भी मान्यता है। कि राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव ने भी स्नान घाट पर अपने पूर्वजों के लिए किया था। पिंडदान इसलिए लोग अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए लोग पिंडदान करते है। और पिंडदान करने से उन आत्माओं को मुक्ति मिलती है। जिनकी अकाल मृत्यु हुई है। और परिवार को पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। कस्बा बाजार स्थित पक्का बलुआ घाट गंगा नदी पहुंचकर पितरों की शांति के लिए पिंडदान के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी।

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