नवीन प्रकाश सिंह की रिपोर्ट
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के व्यावहारिक कौशल, आत्मनिर्भरता एवं सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित “ब्रेल पठन एवं लेखन तथा अभिविन्यास एवं गतिशीलता” विषयक पाँच दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन विभिन्न तकनीकों एवं व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यशाला के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय सत्र में डॉ. आशीष कुमार गुप्ता, डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ ने ब्रेल लेखन की विभिन्न तकनीकों, ब्रेल लेखन उपकरणों तथा उनके उपयोग के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को ब्रेल लेखन उपकरणों के माध्यम से लेखन का व्यावहारिक अभ्यास कराया। इसके साथ ही डीबीटी (DBT) सॉफ्टवेयर के उपयोग एवं ब्रेल लेखन अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों के कौशल विकास पर विशेष बल दिया गया।
चतुर्थ एवं पंचम सत्र में श्री विकास मिश्रा, अभिविन्यास एवं गतिशीलता विशेषज्ञ, समेकित क्षेत्रीय केंद्र (सी.आर.सी.), लखनऊ ने दृष्टिबाधित व्यक्तियों की सुरक्षित एवं स्वतंत्र गतिशीलता से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने ट्रेलिंग प्रोटेक्टिव तकनीक (Trailing Protective Technique) तथा साइटेड गाइड तकनीक (Sighted Guide Technique) के बारे में विस्तार से बताया। इन तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को सुरक्षित आवागमन, बाधाओं की पहचान तथा सहायक व्यक्ति के मार्गदर्शन से चलने की विधियों का अभ्यास कराया गया।
कार्यशाला के तीसरे दिन के प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य दृष्टिबाधित विद्यार्थियों में ब्रेल लेखन कौशल, सुरक्षित आवागमन, आत्मविश्वास एवं स्वतंत्रता को बढ़ावा देना रहा। सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक अभ्यासों ने प्रतिभागियों को दैनिक जीवन में इन तकनीकों के प्रभावी उपयोग के लिए सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों का समन्वय डॉ. बिनीता एवं डॉ. श्रुति पाण्डेय द्वारा किया जा रहा है। यह कार्यशाला दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के शैक्षिक एवं व्यावहारिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
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