अंजली कुमारी की रिपोर्ट
वाराणसी। बनारस के स्थानीय सर्राफा व्यापार और पारंपरिक कारीगरों के हितों की रक्षा के लिए प्रस्तावित ज्वेलरी एग्जीबिशन के विरोध में व्यापारी एवं कारीगर लंबे समय से अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्थानीय व्यापार को सुरक्षित रखना, बनारस की ऐतिहासिक सर्राफा मंडी की पहचान बनाए रखना और पीढ़ियों से स्वर्ण आभूषण निर्माण में जुटे कारीगरों की आजीविका की रक्षा करना है।
व्यापारी एवं कारीगर वर्ग का कहना है कि जब स्थानीय बाजार और स्थानीय कारीगर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हों, तब उनके हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती।
एग्जीबिशन के नियमों और खरीद-बिक्री की व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय व्यापारियों एवं कारीगरों की प्रमुख आपत्ति यह है कि ज्वेलरी एग्जीबिशन में स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों को अपेक्षित प्राथमिकता एवं अवसर नहीं मिलते। साथ ही, एग्जीबिशन में खरीद-बिक्री की प्रक्रिया, व्यापारिक नियमों के पालन तथा माल की बिक्री की व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
व्यापारी वर्ग की मांग है कि एग्जीबिशन में लागू नियमों का पारदर्शी तरीके से पालन सुनिश्चित किया जाए और व्यापारिक गतिविधियां निर्धारित नियमों के अनुरूप ही संचालित हों। स्थानीय व्यापारियों एवं कारीगरों के हितों की अनदेखी कर किसी भी व्यापारिक गतिविधि को आगे बढ़ाना उचित नहीं है।
व्यापार पहले से दबाव में, अब स्थानीय कारोबार की चिंता और बढ़ी
हाल के दिनों में सोने की खरीद को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा की गई अपील के प्रभाव को लेकर भी सर्राफा व्यापारियों ने चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि सोने की खरीदारी में कमी अथवा ग्राहकों के खरीदारी संबंधी निर्णयों में बदलाव का सीधा असर सर्राफा कारोबार, बिक्री और उससे जुड़े कारीगरों की आजीविका पर पड़ सकता है।
ऐसे समय में स्थानीय व्यापारियों के सामने अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा और व्यापार प्रभावित होने की आशंका गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए व्यापारियों की मांग है कि स्थानीय व्यापार की परिस्थितियों और कारीगरों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएं।
लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष, जरूरत पड़ी तो प्रदेश सरकार तक पहुंचेगी आवाज़
इस अभियान से जुड़े व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध पूरी तरह लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और अपने व्यापारिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से है। यह किसी व्यक्ति विशेष, संस्था या संगठन के विरुद्ध व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है।
यह बनारस के स्थानीय व्यापार, छोटे कारोबारियों, पारंपरिक स्वर्णकारों और उन कारीगरों के भविष्य की लड़ाई है, जिनकी मेहनत से बनारस की स्वर्ण कला देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाए हुए है।
व्यापारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को शासन-प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखेंगे। इसी क्रम में आने वाले दिनों में जिलाधिकारी महोदय को ज्ञापन सौंपकर स्थानीय व्यापार एवं कारीगरों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर इस विषय को प्रदेश सरकार के समक्ष भी उठाया जाएगा।
बनारस की सर्राफा मंडी केवल बाजार नहीं, सदियों पुरानी विरासत है
विश्व की प्राचीनतम नगरी काशी की पहचान केवल उसके धार्मिक और सांस्कृतिक वैभव तक सीमित नहीं है। यहां का पारंपरिक सर्राफा कारोबार, स्वर्ण आभूषण निर्माण की कला और पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरों की दक्षता भी इसकी महत्वपूर्ण विरासत है।
बनारस की सर्राफा मंडी पूर्वांचल के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में गिनी जाती है। यहां हजारों परिवार प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से आभूषण कारोबार और कारीगरी से जुड़े हैं।
यदि स्थानीय व्यापार कमजोर होगा, तो उसका असर केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन कारीगरों और उनके परिवारों तक पहुंचेगा, जिनकी आजीविका इसी कारोबार पर निर्भर है।
इसीलिए व्यापारियों का स्पष्ट संदेश है कि बनारस की पारंपरिक सर्राफा मंडी और स्थानीय कारीगरों के हितों की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।
🔴 व्यापारियों के साथ प्रमुख संगठनों का समर्थन
इस विरोध अभियान का नेतृत्व श्री नवनीत सर्राफ, श्री किशन सेठ स्वर्णकार, श्री शुभम सेठ ‘गोलू’, श्री अमन सर्राफ एवं श्री सूरज दयाल सेठ कर रहे हैं।
इस मुहिम को स्थानीय व्यापारिक एवं सामाजिक संगठनों का भी समर्थन प्राप्त हुआ है। इनमें काशी सर्राफा मंडल, उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ एवं सोनार नरहरी सेना प्रमुख हैं। इन संगठनों के समर्थन से स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों की मांगों को मजबूती मिली है।
अभियान से जुड़े लोगों ने पत्रकारों, शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे इस विषय की गंभीरता को समझें और स्थानीय व्यापार एवं कारीगरों के हितों की रक्षा के लिए उनकी मांगों पर उचित विचार करें।
व्यापारियों का स्पष्ट संदेश
हम किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं हैं। हमारा उद्देश्य बनारस के स्थानीय व्यापार को बचाना, कारीगरों की रोज़ी-रोटी सुरक्षित रखना और अपनी पारंपरिक सर्राफा मंडी की पहचान को कायम रखना है। हम लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात शासन-प्रशासन तक पहुंचाएंगे और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहेंगे।”
स्थानीय व्यापार बचेगा, तभी कारीगर का परिवार आगे बढ़ेगा!
व्यापारी एकता ज़िंदाबाद! कारीगर एकता ज़िंदाबाद!
बनारस की सर्राफा मंडी की पहचान—हमारा सम्मान, हमारी विरासत!
स्थानीय व्यापार एवं कारीगर हित संरक्षण अभियान, वाराणसी
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