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दृष्टि सिंह पटेल ने कराटे में लहराया सफलता का परचम, जिला से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जीते स्वर्ण पदक*

कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट

वाराणसी। प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर बेटियां हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। इसी की एक प्रेरक मिसाल हैं नासिरपुर निवासी, दृष्टि सिंह पटेल, जिन्होंने कराटे के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों से परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। ब्लैक बेल्ट धारक दृष्टि ने जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी खेल प्रतिभा का शानदार परिचय दिया है। वहीं, सीबीएसई नेशनल प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर भी उन्होंने अपनी उपलब्धियों में एक और उपलब्धि जोड़ी है।

दृष्टि सिंह पटेल की प्रमुख उपलब्धियां
 दृष्टि जन सुरक्षा फाउंडेशन द्वारा संचालित Jan Suraksha Academy of Martial Arts की खिलाड़ी हैं। यह एकेडमी TS Shotokan Karate-Do India से संबद्ध है। सृष्टि ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए निम्नलिखित उपलब्धियां हासिल की हैं—

- जिला स्तरीय प्रतियोगिता, सारनाथ — स्वर्ण पदक
- राज्य स्तरीय प्रतियोगिता, लखनऊ — स्वर्ण पदक
- राष्ट्रीय प्रतियोगिता, इटावा — स्वर्ण पदक
- अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता, उत्तराखंड — स्वर्ण पदक
- सीबीएसई नेशनल प्रतियोगिता, पानीपत (हरियाणा) — कांस्य पदक
*दृस्टि* की इस सफलता में उनके प्रशिक्षक मास्टर दीपु कुमार एवं सेंसेई मनीष बिंद का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। नियमित अभ्यास, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण ने सृष्टि को इस मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

बेटी के सपनों को पंख दे रहे पिता, बोले—बेटी भी बेटे के समान

दृष्टि की सफलता की कहानी में उनके पिता जितेंद्र पटेल का सहयोग और प्रोत्साहन भी बेहद महत्वपूर्ण है। नासिरपुर निवासी जितेंद्र पटेल अपनी बेटी को खेल और पढ़ाई, दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करते हैं। उनका मानना है कि बच्चों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने में परिवार की भूमिका सबसे अहम होती है और बेटियों को भी बेटों के समान अवसर मिलने चाहिए।

जितेंद्र पटेल का कहना है, “मुझे बेटी और बेटे में कोई फर्क नहीं दिखाई देता। मेरी बेटी भी मेरे लिए बेटे के समान है। मैं अपनी तरफ से जितना संभव होगा, उसके सपनों को पूरा करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए हर प्रयास करूंगा। मेरी बिटिया को भी खेल के प्रति काफी उत्साह रहता है। वह हमेशा मुझसे खेल और पढ़ाई की ही बातें करती है। उसकी लगन और मेहनत देखकर मुझे खुशी होती है और मैं चाहता हूं कि वह जीवन में और भी आगे बढ़े।”

पिता का यह विश्वास और सहयोग सृष्टि के आत्मविश्वास को मजबूत करता है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि जब परिवार बेटियों की प्रतिभा को पहचानकर उनका साथ देता है, तो वे अपनी मेहनत से सफलता की नई इबारत लिख सकती हैं।

दृष्टि सिंह पटेल की उपलब्धियां न केवल उनके परिवार, बल्कि क्षेत्र की अन्य बेटियों के लिए भी प्रेरणा हैं। खेल के प्रति उनका उत्साह, पढ़ाई को लेकर उनकी रुचि और पिता का प्रोत्साहन इस बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर बेटियां हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

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