विजय कुमार की रिपोर्ट
वाराणसी काशी दीप विजन । विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित उंदी योजना (उंदी ताल पुनर्उद्धार एवं इको-टूरिज्म परियोजना) शहर के बुनियादी ढांचे, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। यह जानकारी विकास प्राधिकरण के अपर सचिव गुडाकेश शर्मा ने काशीवार्ता प्रतिनिधि को दी। उन्होंने बताया कि यह योजना हरहुआ ब्लॉक के उंदी गांव में लगभग 78.5 एकड़ भूमि पर विकसित की जाएगी। इसकी नोडल एजेंसी विकास प्राधिकरण है। लगभग 25 करोड़ से 29.5 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को प्रदेश सरकार एवं पर्यटन विभाग के सहयोग से स्वीकृति मिल चुकी है।
अपर सचिव के अनुसार योजना का मुख्य उद्देश्य जल संचयन एवं भूजल संरक्षण है। इसके लिए उंदी ताल के विशाल प्राकृतिक जल निकाय का जीर्णोद्धार कर वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जाएगा। शहर में हरियाली बढ़ाने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्षेत्र को इको-पार्क/फॉरेस्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। योजना को सारनाथ से जोड़ा जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल सारनाथ के निकट होने के कारण पर्यटकों को एक अतिरिक्त हरित गंतव्य मिलेगा। प्रस्तावित सुविधाओं में नौकायन और जल क्रीड़ा के लिए करीब 50,000 वर्ग मीटर के जल क्षेत्र में बोटिंग की सुविधा शामिल है। पर्यावरण प्रदूषण दूर करने के लिए सघन पौधारोपण होगा और बॉटनिकल गार्डन में देशी वृक्ष, औषधीय पौधे तथा लोटस लेक (कमल ताल) बनाया जाएगा। वेलनेस एवं फिटनेस जोन में ओपन जिम, योगा सेंटर, वॉकिंग ट्रैक और साइकिलिंग ट्रैक उपलब्ध रहेंगे। पर्यटन सुविधाओं के तहत बर्ड वॉच टावर, चिल्ड्रेन प्ले एरिया, कैफेटेरिया और टेंट स्टे/इको-स्टे भी परिसर में होंगे।
अतिक्रमण मुक्त कराकर 3.20 करोड़ से बनी घेराबंदी
विकास प्राधिकरण ने 78.5 एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर 3.20 करोड़ रुपये की लागत से जालीदार घेराबंदी (बाउंड्री) का कार्य पूरा करा दिया है। ताल की गहराई बढ़ाने और जल धारण क्षमता सुधारने के लिए गाद/मिट्टी निकासी का कार्य भी कराया गया है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर शासन ने पर्यटन विकास निधि से बजट की स्वीकृति दी है। वर्तमान में उंदी ताल को इको-पार्क और पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।
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