अंजली कुमारी की रिपोर्ट
*अब छुट्टा मवेशियों से मुक्त कराने के लिए देना होगा 6,000 रुपये अतिरिक्त जुर्माना*
*-नगर निगम वित्तीय बोझ को खुद उठाने के बजाय सीधे लापरवाह पशुपालकों से वसूलने का लिया निर्णय*
*-आय-व्यय और वर्तमान में बढ़ती समस्या को संतुलित करने के लिए बनाई व्यवस्था, तत्काल प्रभाव से लागू*
वाराणसी: शहर की सड़कों पर आवारा और छुट्टा पशु छोड़ने वाले पशुपालकों को अब और भारी पड़ने वाला है। नगर निगम ने सड़कों को छुट्टा मवेशियों से मुक्त कराने के लिए रुख कड़ा कर लिया है। यदि किसी पशुपालक का जानवर निगम की कैचिंग टीम द्वारा पकड़ा जाता है, तो उसे छुड़ाने के लिए तय फीस के अलावा 6,000 रुपये अतिरिक्त जुर्माना देना पड़ेगा।
दरअसल, शहर में लगातार अभियान चलाकर पकड़े गए मवेशियों को ऐढ़े व नक्खीघाट स्थित कांजी हाउस और छितौनी कोट व शहंशाहपुर स्थित कान्हा उपवन में भेजा जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में मवेशियों को ढोने वाले वाहनों के ईंधन, मेंटेनेंस और कर्मचारियों के भत्ते का अच्छा-खासा खर्च आ रहा है। नगर निगम ने इस वित्तीय बोझ को खुद उठाने के बजाय सीधे लापरवाह पशुपालकों पर डालने का फैसला किया है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने स्पष्ट किया कि निगम के आय-व्यय और वर्तमान में बढ़ती समस्या को संतुलित करने के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है। जब तक इस संदर्भ में नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में अंतिम सहमति या निर्णय नहीं हो जाता, तब तक यही आदेश प्रभावी रहेगा।
उधर, पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृत राज ने कांजी हाउस और गौआश्रय केंद्रों का प्रभार संभाल रहे अधिकारियों व कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्हें स्पष्ट कहा गया है कि मवेशी तभी छोड़े जाएं जब पशुपालक निर्धारित शुल्क के साथ 6,000 रुपये का अतिरिक्त व्यय जुर्माना जमा कर दे। इस नियम के पालन में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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