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*वाराणसी से बड़ी खबर : सुप्रीम कोर्ट फैसले के खिलाफ परिषदीय शिक्षकों का चरणबद्ध आंदोलन शुरू*वाराणसी, 20 सितम्बर।मा० सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से उत्पन्न शिक्षकों के अस्तित्व, मान-सम्मान एवं सेवा शर्तों में छेड़छाड़ के मुद्दे पर अब परिषदीय शिक्षकों का आंदोलन तेज हो गया है। टेट मुक्ति संयुक्त मोर्चा, वाराणसी के बैनर तले जनपद के लगभग 15 अनुषांगिक संगठनों के प्रतिनिधि और सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं सड़कों पर उतरे और चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की।*शिक्षकों की प्रमुख बातें :*वक्ताओं ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करते हुए कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक आरटीई अधिनियम 2017 में संशोधन कर 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मुक्त नहीं किया जाता।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने पर आभार जताया गया, मगर इसे "आधी-अधूरी तैयारी" बताया।शिक्षकों का आरोप है कि पुनर्विचार याचिका में इंटरमीडिएट बीटीसी, उर्दू बीटीसी, सीपीएड व डीपीएड योग्यता धारक शिक्षकों का उल्लेख नहीं है।शिक्षकों ने कहा कि 50-55 वर्ष की उम्र में टीईटी परीक्षा पास करना असंगत और अव्यवहारिक है।शिक्षकों की मांगें :1. आरटीई अधिनियम 2017 में संशोधन।2. 2011 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किया जाए।3. पुनर्विचार याचिका की मजबूत पैरवी की जाए।4. शिक्षकों के मान-सम्मान से खिलवाड़ बंद किया जाए।*आंदोलन का स्वरूप :*शिक्षक/शिक्षिकाएं हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर से जुलूस निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुँचे।वहाँ जिलाधिकारी द्वारा नामित प्रतिनिधि को प्रधानमंत्री एवं मानव संसाधन विकास मंत्री भारत सरकार को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।विशेष उपस्थिति :श्री चेत नारायण बह सिंह, पूर्व शिक्षक विधायक / प्रदेश अध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षक संघ उ०प्र०।प्रो. जगदीश नारायण सिंह दीक्षित, संयुक्त महामंत्री, संस्थापक सदस्य राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश एवं महामहिम राज्यपाल द्वारा नामित कार्य परिषद सदस्य, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर।👉 आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जल्द ठोस कदम नहीं उठाती तो यह संघर्ष और व्यापक स्वरूप लेगा। ब्यूरो: नवीन प्रकाश सिंह।

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