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*✈️ क्या सब भगवान भरोसे?**13 साल का अफगानी बच्चा लैंडिंग गियर में छिपकर दिल्ली तक पहुँचा GV, एयरलाइंस और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ाई**दिल्ली एयरपोर्ट पर 21 सितंबर की सुबह सुरक्षा एजेंसियों और एयरलाइंस स्टाफ की लापरवाही ने फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। काबुल से दिल्ली आई केएएम एयरलाइंस की फ्लाइट RQ-4401 में 13 साल का एक अफगानी बच्चा लैंडिंग गियर के हिस्से में छिपकर 94 मिनट की जानलेवा यात्रा कर डाला और एयरपोर्ट पर आराम से घूमता मिला।**👉 चौंकाने वाली बात ये है कि यह बच्चा असल में ईरान जाना चाहता था, लेकिन सीधे दिल्ली पहुँच गया। पूछताछ में पता चला कि बच्चा अफगानिस्तान के कुंदुज शहर का रहने वाला है।**👉 एयरलाइन के इंजीनियरिंग स्टाफ और सुरक्षा एजेंसियों की पोल तब खुली जब पूरे विमान की तलाशी में लैंडिंग गियर एरिया से एक लाल रंग का ऑडियो स्पीकर भी बरामद हुआ। सवाल यह है कि बिना टिकट, बिना दस्तावेज़, एक बच्चा विमान के ऐसे हिस्से तक कैसे पहुँच गया जहाँ न आम इंसान जा सकता है और न सुरक्षा की नज़र चूकनी चाहिए?**👉 सुबह करीब 11:10 बजे जब सिक्योरिटी स्टाफ ने बच्चे को विमान के पास टहलते देखा तो उसे पकड़ा गया। फिर केंद्रीय एजेंसियों और इमिग्रेशन द्वारा पूछताछ के बाद उसे अफगानिस्तान वापस भेज दिया गया।**🔥 इतिहास की याद दिलाने वाली लापरवाही**यह घटना हमें 24 दिसंबर 1999 की IC-814 हाईजैकिंग की कड़वी याद दिलाती है।**तब भी सुरक्षा चूक से काठमांडू से उड़ान भरने वाले इंडियन एयरलाइंस के विमान का आतंकियों ने अपहरण कर लिया था।**178 यात्रियों को बंधक बनाकर एक हफ्ते तक पाँच देशों के चक्कर लगवाए गए थे।**अंततः आतंकियों की रिहाई की शर्त पर यात्रियों को छोड़ा गया था।**आज, 26 साल बाद भी, जब दुनिया की एयरपोर्ट सिक्योरिटी हाई-टेक हो चुकी है, एक बच्चा लैंडिंग गियर में बैठकर दिल्ली पहुँच जाए — क्या यह घटना सुरक्षा प्रणाली पर तमाचा नहीं?** *सवाल जो खड़े होते हैं:**1. एयरपोर्ट पर सुरक्षा जाँच कैसे फेल हो गई?**2. एयरलाइंस का इंजीनियरिंग स्टाफ लैंडिंग गियर की नियमित जाँच क्यों नहीं कर पाया?**3. अगर बच्चा वहाँ तक पहुँच गया, तो क्या हथियारबंद आतंकी भी पहुँच सकते हैं?**4. क्या हम वाकई फिर से भगवान भरोसे हैं?**👉 यह घटना सिर्फ "एक बच्चे की हैरतअंगेज़ यात्रा" नहीं है, बल्कि एयरलाइंस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चेतावनी की घंटी है। वरना इतिहास हमें याद दिलाता है कि एक चूक कितना बड़ा ख़तरा बन सकती है। विशेष रिपोर्ट- ब्यूरो नवीन प्रकाश*

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