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*ए.आई. महज तकनीकी प्रगति नहीं बल्कि दार्शनिक बदलाव है: प्रो एस के सिंह, एस.एम.एस. में शिक्षण में एकीकृत ए.आई., डिज़ाइन थिंकिंग एव एनालिटिक्स विषयक सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम की हुई शुरुआत* वाराणसी, 15 जुलाई: स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट साइंसेज में शिक्षण में एकीकृत एआई, डिज़ाइन थिंकिंग और एनालिटिक्स विषय पर सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) शुरू हुआ। इसका उद्देश्य 21वीं सदी की शिक्षा की उभरती माँगों को पूरा करने के लिए आवश्यक उपकरणों, कौशल और दृष्टिकोणों से संकाय को सशक्त बनाना है।उद्घाटन सत्र में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एस. के. सिंह मुख्य अतिथि के रूप में व डॉ. बाला रामदुरई, सीईओ, स्‍पाइरेलिया, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सात दिवसीय एफ़.डी.पी. के उदघाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए प्रो. एस. के. सिंह ने उच्च शिक्षा में हो रहे आमूल परिवर्तन पर ज़ोर देते हुए कहा कि हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ ए.आई. केवल एक तकनीकी प्रगति नहीं है, बल्कि ज्ञान प्रदान करने और ग्रहण करने के तरीके में एक दार्शनिक बदलाव है। आज की शिक्षा में अनुकूलनशीलता और विश्लेषणात्मक अंतर्दृष्टि की आवश्यकता है। प्रो. सिंह ने उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए वैश्विक शैक्षणिक मानकों के अनुरूप ढलने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अब केवल तथ्य पढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है; हमें छात्रों को सोचना, समाधान निकालना और नवाचार करना सिखाना होगा।विशिष्ट अतिथि डॉ. बाला रामदुरई ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विश्लेषण और डिज़ाइन थिंकिंग अब विशिष्ट क्षेत्र नहीं रह गए हैं। ये दुनिया भर के हर बड़े संगठन में निर्णय लेने और नवाचार के मुख्य घटक हैं। शिक्षा जगत के लिए, इसका अर्थ है कौशल-संचालित और अंतर्दृष्टि-संचालित शिक्षण की ओर एक आवश्यक परिवर्तन। उन्होंने कहा कि डिज़ाइन थिंकिंग हमें कक्षा को शिक्षार्थी के दृष्टिकोण से देखने की अनुमति देती है। जब हम इसे एआई और डेटा एनालिटिक्स के साथ मिलाते हैं, तो हम अपने शिक्षकों को समग्र, शिक्षार्थी-केंद्रित समाधान तैयार करने के लिए सशक्त बनाते हैं। शिक्षकों को पावरपॉइंट स्लाइड्स और पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़ना होगा। शिक्षकों से विश्लेषण क्षमता की तकनीक विकसित करने की अपील करते हुए डॉ. रामदुरई ने कहा कि छात्रों की सहभागिता की निगरानी के लिए विश्लेषण का उपयोग करना होगा और निरंतर सुधार के लिए डिज़ाइन थिंकिंग को लागू करना होगा। उन्होंने संकाय सदस्यों को आजीवन सीखने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि कल का शिक्षक आज भी एक शिक्षार्थी होना चाहिए।अतिथियों का स्वागत करते हुए एस.एम.एस. वाराणसी के निदेशक प्रो. पी. एन. झा ने कहा कि एस.एम.एस. हमेशा से शैक्षणिक उत्कृष्टता और नवाचार के लिए प्रतिबद्ध रहा है। यह एफ.डी.पी. हमारे संकाय को वैश्विक रूप से सक्षम और भविष्य के लिए तैयार बनाने के हमारे निरंतर प्रयास का प्रतिबिंब है। हमारा मानना है कि शिक्षण में ए.आई., डिज़ाइन थिंकिंग और एनालिटिक्स का एकीकरण एक चलन नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। इस पहल के माध्यम से, हमारा लक्ष्य ऐसे शिक्षकों का विकास करना है जो कक्षा से परे मूल्य सृजन कर सकें—ऐसे शिक्षक जो चुनौतियों को अवसरों में बदल सकें।उद्घाटन सत्र का संचालन एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. भावना सिंह ने व धन्यवाद ज्ञापन प्रो. पल्लवी पाठक ने किया। गौरतलब है कि इस सात दिवसीय एफ.डी.पी. में आने वाले दिनों में देश के जाने माने ए.आई. विशेषज्ञ शामिल होंगे। इस अवसर पर एस.एम.एस. वाराणसी के अधिशासी सचिव डॉ. एम.पी.सिंह, कुलसचिव संजय गुप्ता, कार्यक्रम के संयोजक प्रो. अमिताभ पांडेय, प्रो संदीप सिंह, प्रो अविनाश चंद्र सुपकर सहित समस्त संकाय सदस्य उपस्थित रहे। आयुषी की रिपोर्ट वाराणसी

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