वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता की रिपोर्ट
वाराणसी काशी दीप विजन --सेंट्रल जेल वाराणसी परिसर में बन्दियों द्वारा मंचित होने वाले 10 दिवसीय रामलीला के प्रथम दिन रविवार को मुकुट पूजन किया गया। मुकुट पूजन के बाद नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। कामदेव के द्वारा नारद की समाधि भंग करने का असफल प्रयास किया गया और जब नारद जी की समाधि भंग नहीं हुई तो कामदेव नारद के चरणों में गिरकर क्षमा याचना करने लगता है। जिससे नारद को यह अहंकार हो जाता है कि मैंने काम को जीत लिया। नारद जी यही समाचार भगवान भोलेनाथ को सुनाते हैं।जिसे भोलेनाथ यह कहते हैं कि जो समाचार मुझसे आपने कहा वह श्री हरि विष्णु से कदापि मत कहियेगा और उनको विदा करते हैं। अभिमान वश नारद यह बात भगवान विष्णु से कहते हैं। तब भगवान विष्णु ने अपने भक्त के हृदय से अहंकार को मिटाने के लिए माया रचाते हैं। माया से वशीभूत देवर्षि नारद राजा शीलनिधि की कन्या पर मोहित हो जाते हैं, तथा भगवान विष्णु से अपने जैसा सुंदर स्वरूप प्रदान करने के लिए प्रार्थना करते हैं। भगवान विष्णु ने नारद जी को बानर का रूप देकर विदा करते हैं। जिसे देखकर स्वयंवर में उनकी खूब जग हंसाई होती है। इससे कुपित होकर नारद ने भगवान विष्णु को मनुष्य का रूप धारण करने, नारी विरह में दर-दर भटकने का श्राप देते हैं। नारद ने कहा कि यही वानर उनकी सहायता करेंगे। इसके बाद भगवान राम अपने अंशों सहित अयोध्या में महाराज दशरथ के यहां अवतरित हुए।प्रथम दिन का मंचन यही पर समाप्त किया गया।इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, चिकित्सा अधिकारी अभिषेक सिंह, जेलर अखिलेश कुमार, डिप्टी जेलर अखिलेश कुमार मिश्र, अमित कुमार वर्मा, अशोक कुमार राय, अयोध्या प्रसाद, भोजराज, अमिता श्रीवास्तव, फार्मासिस्ट सन्दीप खरे आदि अधिकारी, कर्मचारी गण व बन्दीगण उपस्थित रहे।
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