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भारत शुरू से ही उद्यमशीलता के कार्यों में रहा अग्रसर : प्रो. आनन्द कुमार त्यागी हर प्रसाद गुप्त इनक्यूवेशन फाउंडेशन एवं आउटरीच प्रकोष्ठ, काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित तथा विकास आयुक्त कार्यालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित वाराणसी। हर प्रसाद गुप्त इनक्यूवेशन फाउंडेशन एवं आउटरीच प्रकोष्ठ, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित तथा विकास आयुक्त कार्यालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का मंगलवार को आयोजन किया गया। साई इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलेपमेंट और विस्तार इकाई सुगंध व सुरेस विकास केंद्र, कानपुर के सहयोग से उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत 'सुगंधित पौधों की खेती एवं विपरण' विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय समिति कक्ष में हुआ। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि भारत शुरू से ही उद्यमशीलता के कार्यों में अग्रसर रहा है। भारत के इत्र और मसाले यहां से पूरी दुनिया में जाते रहे हैं। भारत की जलवायु स्थिति ऐसी है कि हर तरह के पौधे हिंदुस्तान में उगते रहे हैं। ऐसी स्थिति दुनिया में कहीं नहीं है। अग्रेजों के लिए चाय दुर्लभ थे, जबकि भारत में ऐसे ही चाय बगान बहुतायत थे। अपने बच्चों को इसे पहचानने की जरूरत है। कुलपति प्रो. त्यागी ने कहा कि आज चिकित्सा के क्षेत्र में जो एलोपैथ मेडिसिन का दुष्प्रभाव मानव जीवन के ऊपर पड़ रहा है, उसके विकल्प के रूप में चिकित्सीय पौधों का ज्यादा इस्तेमाल किया जाने लगा है। हम सभी अपनी परंपरा को कायम रखते हुए ही विश्व गुरु बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज उद्यमशीलता के माध्यम से हमें दूसरे को अवसर देने वाला बनना चाहिए।हर प्रसाद गुप्त इनक्यूवेशन फाउंडेशन के निर्देशक प्रो. मोहम्मद आरिफ ने बताया कि यह कार्यशाला विद्यापीठ एवं साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलेपमेंट के बीच एम.ओ.यू. के अंतर्गत आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का इनक्यूबेशन फाउंडेशन विद्यार्थियों को स्वालंबी और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बहुत सारे प्रशिक्षण कार्यक्रम कर रहा है। इसी उद्देश्य से आज के कार्यशाला का आयोजन विद्यार्थियों को सफल उद्यमी बनाना और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया है। आउटरीच प्रकोष्ठ के निर्देशक प्रो. संजय ने कहा कि हमें तुलसी के पौधे और लेमन ग्रास को एक नए पेय के रूप में विकसित करना चाहिए, जो हमारे सेहत के लिए बहुत गुणकारी है। उन्होंने विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण के लिए प्रोत्साहित किया तथा सुगंधित पौधे की खेती और विपणन के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।विशिष्ट अतिथि के रूप में इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव राजेश भाटिया ने कहा कि असंभव को संभव बनाने का साहस ही उद्यमिता है, जो नौकरियां पैदा करता है वही उद्यमी है। उसे अपने दम पर कुछ नया करना है, अपने देश, समाज और राष्ट्र के लिए कुछ करने का साहस होना चाहिए। तकनीकी वक्ता के रूप में संजय रस्तोगी, आई.पी.आर. विशेषज्ञ ने अपने उद्बोधन में संगीत उपचार की चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को संगीत से माध्यम से कई प्रकार के बीमारियों के उपचार के सूत्र बताए। वाराणसी में अपने अनुभवों को साझा करते हुए अलग अलग मंदिरों से निकलने वाले फूल और पत्तों के उचित सदुपयोग के बारे में विद्यार्थियों को बताया। उन्होंने उद्यमशीलता को परिभाषित करते हुए देश को विश्व गुरु बनाने में विद्यार्थियों की भूमिका की चर्चा की। एफ.एफ.डी.सी. विस्तार इकाई, कानपुर के सहायक निदेशक डॉ. भक्ति विजय शुक्ला ने कहा कि उद्यमशीलता की शुरुआत उद्यमशील व्यक्ति के प्रस्तुतिकरण से होता है। एरोमा पद्धति की बात रखते हुए रामायण आदि काल से आजतक उपचार के रूप में इसके प्रयोग पर चर्चा किया। स्वागत साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलेपमेंट के निदेशक अजय कुमार सिंह, संचालन डॉ. रवि प्रकाश सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन अजय कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, डॉ. विजय कुमार, डॉ. विश्वजीत, डॉ. पीयूष मणि त्रिपाठी, डॉ. जयदेव पाण्डेय, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. ज्योति त्रिपाठी, डॉ. अमित सिंह आदि उपस्थित रहे।

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