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महर्षि जमदग्नि के शिष्य पराशर द्वारा रचित पराशरसंहिता भी एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। जो ज्योतिषशास्त्र और वास्तुशास्त्र के क्षेत्र में ज्ञान प्रदान करती है। जमानियां। महर्षि जमदग्नि की प्रतिमा के लिए सोमवार की शाम भूमिपूजन किया गया है। इस दौरान नगरचपालिका अध्यक्ष जय प्रकाश गुप्ता, पालिका अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार जमदग्नि कि प्रतिमा लगाने के लिए भूमि पूजन में शामिल रहे। इस दौरान नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष जय प्रकाश गुप्ता ने बताया कि महर्षि जमदग्नि की प्रतिमा लगे जाने और उसके आसपास सुंदरीकरण के लिए भी अथक प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया भूमि पूजन के बाद जमदग्नि ऋषि प्रतिमा लगाएं जाएंगे। जिससे देखने और दर्शन करने वालों की भीड़ उमड़ेगी। जिसके बाद व्यापारियों को काफी लाभ पहुंचेगी। गुप्ता ने बताया कि हरपुर में परशुराम मंदिर होने के बाद महर्षि जमदग्नि की प्रतिमा भी पालिका स्तर लगाने के लिए जीतोड़ मेहनत की जा रही है। परशुराम मंदिर होने के बाद महर्षि जमदग्नि की प्रतिमा लगाए जाने के लिए भूमि पूजन किया गया। पालिका अध्यक्ष जय प्रकाश गुप्ता ने बताया कि एन एच 24 सड़क पटरी स्थित राजकीय बालिका इंटर कालेज की बाउंड्री पर बने महिला पुलिस पिंक बूथ के बगल में खाली स्थान परमहर्षि जमदग्नि की प्रतिमा लगाया जाएगा। इसके साथ ही आसपास में सुंदरीकरण करने और सुविधाओं का विकास करने के लिए योजनाएँ बनाई गई हैं। जिसके अंतर्गत भूमिपूजन किया गया। जमदग्नि ऋषि और उनके पुत्र भगवान परशुराम की स्मृति को जीवित रखने और धार्मिक महत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह प्रयास किया गया है। गुप्ता ने बताया कि भारतीय संस्कृति के एक महान ऋषि जमदग्नि एक वैज्ञानिक थे। जिनका योगदान विज्ञान और तत्त्वज्ञान के क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है। उनकी अमृतवाणी और शिक्षाएं आज भी समृद्धि के स्रोत के रूप में बनी हुई हैं। और उनके योगदान से आधुनिक विज्ञान और तत्त्वज्ञान को भी महत्वपूर्ण दिशा मिली है। इसके साथ ही महर्षि जमदग्नि ने अपने शिष्य, महर्षि पराशर को तत्त्वज्ञान और धर्मशास्त्र के क्षेत्र में शिक्षा दी। उनकी शिक्षाएं आज भी वेदांत और धर्मशास्त्र के अध्ययन में महत्वपूर्ण हैं। जय प्रकाश गुप्ता ने बताया कि महर्षि जमदग्नि ने अपने पुत्र परशुराम को भगवान शिव के अवतार के रूप में पाला था। और उनकी शिक्षा के फलस्वरूप भगवान परशुराम ने भूमंडल में धर्म स्थापना किया। उन्होंने बताया कि ​जमदग्निसंहिता संस्कृत ग्रंथ महर्षि जमदग्नि द्वारा रचित जमदग्निसंहिता एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो धर्म, तत्त्वज्ञान, और योग के सिद्धांतों को समर्थन करता है। यह ग्रंथ आज भी धार्मिक एवं तात्त्विक अध्ययन के लिए प्रसिद्ध है। उक्त मौके पर संजीत यादव, बी के त्रिवेदी, कुमार शैलेन्द्र, अनिल कुमार मधेशिया, तारकेश्वर वर्मा, दानिश मंसूरी, विजय शंकर राय, विजय शंकर शर्मा, छविनाथ यादव, सहित पालिका कर्मी मौजूद रहे। सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया

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