ऋषियों के निर्दिष्ट सदाचार एवं उनके अनुशीलन से दिव्य सनातन का उदय - प्रो शंकर मिश्रा वाराणसी: ऋषि पंचमी के पावन अवसर पर एस आर डी गुरुकुल फाउंडेशन के संस्कृत प्राङ्गण में वर्तमान ऋषि - मनीषियों का सम्मान एवं आशीर्वाद ग्रहण तथा "भारतीय संस्कृति में ऋषियों की महत्ता" पर संगोष्ठी कार्यक्रम का आरम्भ गुरुकुल के बटुकों द्वारा वैदिक एवं लौकिक मङ्गलाचरण के साथ किया गया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो.शंकर मिश्र धर्मशास्त्र - मीमांसा विभागाध्यक्ष, बि एच यू ने धर्मशास्त्रों में ऋषियों के महत्त्वपूर्ण योगदान को उदाहरण देकर आधुनिक काल में उनके धर्माचरण को धारण करने के लिए प्रेरित किया । प्रो.मिश्र जी ने सृष्टि,स्थिति, संहृति, निग्रह एवं अनुग्रह के प्रकल्पों में ऋषि निर्दिष्ट सदाचार एवं उनके अनुशीलन से न केवल दिव्य सनातन संस्कृति का संरक्षण होता है अपितु आयु - आरोग्यता में हमारे ऋषियों द्वारा प्रतिपादित यम - नियम - आसन - प्राणायम - धारणा - ध्यान के बल पर स्वस्थ समाज की संरचना जिसमें समरसता - सामंजस्य की अविरल धारा समुन्नत राष्ट्र के लिए सभ्य नागरिकों का निर्माण होता है ।कार्यक्रम के समापन में संस्था के संस्थापक सह निदेशक डाॅ.मनोज कुमार ठाकुर ने सभी समुपस्थित मान्य ऋषिगणों को धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा की आपका कुशल निर्देश ऋषि परम्परा को प्रमुदित एवं प्रशस्ति प्रदान करता रहेगा जिससे हमारा राष्ट्र धर्म नियंत्रित, पक्षपात विहीन, शोषण विनिर्मुक्त तथा सर्वहितप्रद परिचारक नागरिक का निर्माण करने वाला होगा इस अवसर पर बहुत सारे विद्वानों की उपस्थिति रही।।
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