गरीब महिलाओं को बाहर से मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने को मजबूर।जमानियां। डिलेवरी के लिए पहुंच रही महिलाओं को अस्पताल की दवा ना देकर बाहर की दवा के लिए पर्ची लिखी जाती है। गरीब महिला मरीजों में केंद्र प्रभारी चिकित्सक के खिलाफ रोष। कस्बा बाजार स्थित सबसे पुरानी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दिन पर दिन बदहाली की कगार पर पहुंचने को व्याकुल है। उसपर से केंद्र प्रभारी की घोर उदासीनता और लापरवाही के चलते डिलीवरी कराने आई महिलाओं को ऑपरेशन के बाद दवा केंद्र से नहीं दी जाती। केंद्र प्रभारी दवाइयाँ बाहर से लिखी जा रही हैं। जब की केंद्र पर दवाइयां होने के बाद भी दवाइयों की पर्ची अस्पताल के बाहर के मेडिकल स्टोर से लेने के लिए देते हैं। इसका कारण यह हो सकता है कि अस्पताल में काफी मात्रा में दवाइयों का स्टॉक होने पर भी दवाइयाँ अस्पताल के बाहर से खरीदने को मजबूर कर दिया गया है। कुछ मामलों में डॉक्टर मरीजों को उनकी सुविधा के अनुसार किसी भी मेडिकल स्टोर से दवाइयाँ खरीदने की अनुमति देते हैं। केंद्र पर दवा उपलब्ध नहीं रहने पर ही डॉक्टर आमतौर पर अंदर और बाहर दोनों जगह की दवाएं लिखते हैं। शकुंतला देवी, राधिका देवी, मंजू, आरती ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डिलेवरी कराने के लिए महिलाए पहुंचती। लेकिन आपरेशन के बाद अंदर से दवा ना देकर बाहर से दवा खरीदने के लिए पर्ची लिखी जाती है। जिसके कारण गरीब मरीजों के सामने गंभीर समस्याएं खड़ी हो जाती है। उन्होंने बताया कि अगर इसकी शिकायत केंद्र प्रभारी से किया जाता है। तो डांट फटकार कर भगा दिया जाता है। मरीजों का कहना रहा कि केवल बाहर की दवाएं दी जा रही हैं। गंभीर समस्या को लेकर उच्चाधिकारियों उनसे स्पष्टीकरण मांगना चाहिए। कि अंदर की दवाएं क्यों नहीं लिखी जा रही हैं।बता दें कि अंदर की दवाएं, जैसे कि एंटीबायोटिक्स, संक्रमण को रोकने में मदद करती हैं। प्रसव के बाद दर्द होना सामान्य है। अंदर की दवाएं जैसे कि दर्द निवारक, दर्द को कम करने में मदद करती हैं। यदि आपको केवल बाहर की दवाएं दी जा रही हैं। तो आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए। सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया
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