*-राजेश्वरी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में साहित्यकार चन्द्रमा सिंह की 92वीं जयंती पुस्तक विमोचन समारोह*-वाराणसी, हरहुआ।राजेश्वरी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आज प्रख्यात साहित्यकार चन्द्रमा सिंह की 92वीं जयंती पर एक गरिमामय साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दो सत्रों में परिचर्चा और काव्यपाठ का आयोजन हुआ, जिसमें साहित्यप्रेमियों और विद्वानों की भागीदारी उल्लेखनीय रही।कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष प्रो. रामानन्द राय ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में न्यायाधीश चन्द्रभाल सुकुमार उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रसिद्ध समीक्षक डॉ. राम सुधार सिंह और डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह मौजूद थे।महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक डॉ. राघवेन्द्र नारायण सिंह ने अपने पिता चन्द्रमा सिंह के साहित्यिक अवदान और जीवन संघर्ष पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें जनांदोलनधर्मी कवि बताया। उन्होंने कहा कि चन्द्रमा सिंह की कविता आमजन की पीड़ा और संघर्ष की आवाज़ है।मुख्य वक्ता प्रो. इंदीवर पांडेय ने उनके साहित्य की प्रासंगिकता पर बल देते हुए शोध की आवश्यकता बताई। न्यायाधीश चन्द्रभाल सुकुमार ने चन्द्रमा सिंह को जमीन से जुड़ा हुआ प्रगतिशील साहित्यकार बताया, जबकि डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह ने उनकी कविताओं को संघर्ष से जन्मी सृजनात्मकता की मिसाल बताया।काव्यपाठ सत्र की अध्यक्षता पूर्व वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी दिनेश चंद्र ने की। इस सत्र में पं. छतीश कुमार द्विवेदी कुंठित मुख्य अतिथि थे, जबकि भोलानाथ द्विवेदी और डॉ. ऐश्वर्या सिन्हा चित्रांश विशिष्ट अतिथि रहीं।काव्यपाठ में आकाश मिश्रा, देवेन्द्र कुमार, पं. टीकाराम शर्मा आचार्य, पुष्पेन्द्र अस्थाना 'पुष्प', डॉ. मधूलिका राय 'मधु', राम जतन पाल, विश्वनाथ कुमार, संध्या मौर्य, नीलम मौर्या, खरीद अहमद 'राही', निशार अहमद एवं आशिक बनारसी जैसे कवियों ने अपनी सशक्त रचनाएं प्रस्तुत कीं।इस अवसर पर डॉ. राघवेन्द्र नारायण सिंह द्वारा रचित सातवाँ उपन्यास "उपन्यास की नायिका" तथा "साहित्यकार चन्द्रमा सिंह : सृजन और जीवनसंघर्ष" पुस्तकों का भव्य विमोचन भी किया गया।कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. लियाकत अली 'जलज' ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन उपनिदेशक अंशुमान सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। संजना वर्मा की रिपोर्ट वाराणसी
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