गंगा नदी में बढ़ाव के बाद और घटाव होने पर कटान का सिलसिला शुरू होता है।जमानियां। गंगा नदी में बढ़ाव के बाद और घटाव होने पर कटान का सिलसिला शुरू होता है। स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि कटाव की समस्या एक किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी तक फैली हुई है। उनका यह भी कहना है। कि जब तक नदी पर और ठोकर नहीं बनाए जाएंगे, तब तक कटाव को रोकना मुश्किल होगा। उन्होंने बताया कि कटाव की समस्या एक गंभीर समस्या बनी हुई है। इस लिए गंगा नदी के किनारे बसे लोगों के लिए कटाव एक गंभीर समस्या बन चुकी है। खासकर तब जब नदी का जलस्तर कम होता है। जिला पंचायत सदस्य बसंत यादव, रजनीकांत यादव, गोरखनाथ सिंह यादव, दयाराम दास आदि स्थानीय किसान और ग्रामीण का कहना रहा कि ज्यादातर कटाव के कारण अपनी जमीन खोने से चिंतित रहता हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील किया है। कि मलसा गंगा नदी किनारे तक कटाव को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने और ठोकर बनाने के लिए अपील की है। रजनीकांत यादव, बसंत यादव ने बताया कि जब गंगा का जलस्तर कम होता है। तो कटाव की गति तेज हो जाती है, जिससे कटाव का क्षेत्र बढ़ जाता है। गंगा का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ है, जिससे कटाव की समस्या और बढ़ गई है। प्रदूषण ने भी गंगा नदी के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। इस लिए गंगा नदी में कटाव की भयावह स्थिति को दर्शाता है। किसानों। का कहना रहा कि गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने और घटाव होने पर सबसे ज्यादा बडेसर, मतसा में कटान तेजगति से जारी होता है। वैसे तो जीवपुर, रघुनाथपुर, खावपूरा, मलसा,देवा बैरनपुर, देवरिया, पासैयदराजा, सबलपुर कला, सहित आदि गांव के गंगा किनारे जबरदस्त कटान होती है। बताया जाता है। कि एन एच 24 से सटे बडेसर के पास जबरदस्त कटान को रोकने के लिए जेसीबी मशीन के माध्यम से ठोकर बनाया जा रहा है। सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया
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