Top News

जमानियां में निकाली गई अखाड़ा जुलूस:सैकड़ों नौजवानों ने किया मातम हजरत इमाम हुसैन की याद में मनाते हैं गम जमानियां। सैकड़ों नौजवानों ने किया मातम , हजरत इमाम हुसैन की याद में मनाते हैं गम। एक दस तक मोहर्रम पर्व पर अखाड़ा जुलूस निकलता है। मोहर्रम की 10 वीं तारीख को आशूरा कहते है। बताया जाता है। कि चांद का दीदार होने के बाद मोहर्रम पर्व शुरू हो जाता है। और एक से दस तारीख तक लाठी से करतब दिखाते हुए अखाड़ा जुलूस निकाला जाता है। मोहर्रम की पहली तारीख से जुलूस अखाड़ा मातम जुलूस निकाला जाता है। इस दौरान मौलाना असरफ करीम कादरी ने कर्बला की दास्तान सुनाई। उन्होंने बताया कि चांद के नजर आते ही पूरी दुनिया के कर्बला, इमामबाड़ा, इमाम चौक में सफाई व चिराग बत्ती का दौर शुरू हो जाता है। और इसी तरह पांचवी मोहर्रम को अखाड़ा जुलूस शांतिपूर्ण निकाली गई। सैकड़ों नौजवानों ने मातम करते हुए। या अली या हुसैन की सदाएं बुलंद कर रहे थे। अखाड़ा जुलूस में बिजली कटौती नासूर बना रहा। मोहर्रम के पर्व पर हजरत इमाम हुसैन की याद में निकाली जाती है। नूरी मस्जिद के इमाम कादरी ने बताया कि हजरत इमाम हुसैन व उनके साथियों की याद जुलूस मातम के साथ किया जाता है। उन्होंने बताया कि हजरत इमाम हुसैन पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहो सल्लम के नवासे थे। इनको कर्बला के मैदान में यजीद ने 10 मोहर्रम को शहीद किया था। मोहर्रम के पर्व पर कर्बला की मैदान में 72 साथियों के इस्लाम के दुश्मनों के साथ लड़ते लड़ते शहीद हो गए। शाही जामा मस्जिद के सेकेट्री मौलाना तनवीर रजा ने बताया कि यह खुशी नहीं गम का महीना है। उन्होंने बताया कि उनकी याद में तमाम अकीदतमंदों की भीड़ आनी शुरू हो जाती है। इस दौरान रजा के द्वारा सलातो सलाम का नजराना पेश किया गया। बता दें कि मोहर्रम जिसे गमे हुसैन कहा जाता है। इसे दुनिया के सारे मजहब के लोग मनाते हैं। मोहर्रम के सातवें दिन कर्बला मैदान से आकर मिट्टी रखने की परंपरा है। मोहर्रम के नवें दिन ताजिया अपने अपने चिह्नित स्थान तक गश्त के लिए निकलती है। और दसवें दिन अखाड़ा, जुलूस के साथ कर्बला के लिए रवाना किया जाता है। इस दौरान तमाम अंजुम कमेटी के द्वारा नौवाखानी पेश की जाती है। नौवाखानी दास्तान सुनकर उपस्थित लोगों की आँखें नम हो जाती है। इस दौरान मुस्लिम महिलाएं, मुस्लिम पुरुष गण फूट फूट कर रोने लगते है। इसी लिए कहा जाता है। कि यह खुशी नहीं गम का होता महीना होता है। और नये साल की शुरुआत मोहर्रम के महीने से ही होती है।

Post a Comment

और नया पुराने