विजय कुमार की रिपोर्ट
वाराणसी। हेपेटाइटिस-सी के उपचार के क्षेत्र में चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (आईएमएस-बीएचयू) ने महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है। आईएमएस-बीएचयू के गैस्ट्रोलॉजी विभाग की सक्रिय सहभागिता वाले बहुकेंद्रीय रिजॉल्व अध्ययन के निष्कर्ष विश्व की प्रतिष्ठित चिकित्सा शोध पत्रिका ‘द लैंसेट’ में 30 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुए हैं।अध्ययन में पाया गया कि बिना सिरोसिस वाले और पूर्व में उपचार न लिए हुए उपयुक्त हेपेटाइटिस-सी मरीजों में सोफोसबुविर-वेलपटासवीर का आठ सप्ताह का उपचार, मानक 12 सप्ताह के उपचार की तुलना में प्रभावशीलता में कमतर नहीं है। भारत के छह प्रमुख चिकित्सा एवं शोध केंद्रों पर किए गए अध्ययन में कुल 880 मरीजों को शामिल किया गया। इनमें 443 मरीजों को आठ सप्ताह और 437 मरीजों को 12 सप्ताह का उपचार दिया गया।
आठ सप्ताह के उपचार समूह में उपचार के 12 सप्ताह बाद स्थायी विषाणु प्रतिक्रिया 98.8 प्रतिशत, जबकि 12 सप्ताह के समूह में यह 99 प्रतिशत रही। दोनों समूहों के परिणाम लगभग समान रहे और निर्धारित मरीज समूह में आठ सप्ताह का उपचार प्रभावशीलता की दृष्टि से 12 सप्ताह के उपचार से कमतर नहीं पाया गया।
अध्ययन में आईएमएस-बीएचयू के गैस्ट्रोलॉजी विभाग के डॉ. विनोद कुमार की प्रमुख भूमिका रही। वे शोध-पत्र के प्रमुख सह-लेखकों में शामिल हैं। विभाग के डॉ. एस.के. शुक्ला, डॉ. देवेश प्रकाश यादव तथा डॉ. अनुराग कुमार तिवारी ने भी अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका और सक्रिय योगदान दिया। एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ के डॉ. अमित गोयल शोध के प्रमुख अन्वेषकों में शामिल रहे और प्रकाशित शोध-पत्र के प्रथम लेखक हैं।
‘द लैंसेट’ में शोध का प्रकाशन आईएमएस-बीएचयू और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है।
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