विजय कुमार की रिपोर्ट
वाराणसी: काशी के नमो घाट पर गंगा के पावन तट पर भारतीय वायुसेना का तीन दिवसीय एयर शो ‘विंग्स ओवर गंगा’ इन दिनों देशभर का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। 22, 24 और 25 अक्टूबर 2026 को हो रहे इस भव्य आयोजन में देशभर के 12 एयर बेस से लगभग एक सौ विमान भाग ले रहे हैं। इनमें बावन लड़ाकू विमान शामिल हैं जिनमें राफेल, सुखोई-30एमकेआई, स्वदेशी तेजस, मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर प्रमुख हैं। पंद्रह ट्रांसपोर्ट विमान तथा बत्तीस हेलीकॉप्टर भी इस प्रदर्शन का हिस्सा बने हुए हैं। अनुमान है कि इन तीन दिनों में पंद्रह से बीस लाख दर्शक घाटों और गंगा के विपरीत किनारे पर जमा होंगे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब ग्यारह हजार नौ सौ कर्मी तैनात किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अंतिम दिन उपस्थित रहने की संभावना इस आयोजन को और भी महत्वपूर्ण बना रही है। यह शो महज विमानों का प्रदर्शन नहीं बल्कि भारत की सैन्य क्षमता, सांस्कृतिक विरासत, पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास और युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं का एक साथ सशक्त प्रस्तुतीकरण है।
सरकार इस आयोजन के माध्यम से देशवासियों और विश्व समुदाय दोनों को स्पष्ट संदेश देना चाहती है। देशवासियों के लिए यह संदेश है कि भारतीय वायुसेना आज आधुनिक, सक्षम और आत्मनिर्भर है। स्वदेशी तेजस तथा प्रचंड जैसे प्लेटफॉर्म ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ठोस सफलता के जीवंत प्रमाण हैं। विश्व के समक्ष यह दिखाया जा रहा है कि भारत अपनी सैन्य शक्ति को अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान से अलग नहीं रखता बल्कि दोनों को एक सूत्र में पिरोकर प्रस्तुत करता है। जब राफेल और तेजस गंगा के ऊपर उड़ान भरते हैं तो यह दृश्य केवल तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन नहीं रह जाता बल्कि एक सभ्यता की आत्मविश्वास भरी घोषणा बन जाता है।
काशी विश्व की सबसे प्राचीन जीवित नगरियों में से एक है। यहां शिव का शाश्वत वास माना जाता है, गंगा मोक्षदायिनी है और घाटों पर सदियों से जीवन-मरण का चक्र निरंतर चलता रहा है। एयर शो की संरचनाओं के नाम भी इसी सनातन विरासत से गहरे जुड़े हुए हैं। ओंकार, रुद्र, त्रिदेव, कैलाश, नटराज, विश्वनाथ, पशुपति, नीलकंठ, भागीरथी, अस्सी, दशाश्वमेध जैसी संरचनाएं केवल नाम नहीं बल्कि काशी की आध्यात्मिक चेतना का आकाश में विस्तार हैं। जब विमान गंगा के ऊपर त्रिरंगा धुआं छोड़ते हैं और घाटों पर ‘हर हर महादेव’ तथा ‘भारत माता की जय’ के नारे एक साथ गूंजते हैं तो आधुनिकता और सनातनता का अद्भुत मेल दिखाई देता है। शहर की व्यापक सजावट में भी गंगा की लहरें, घाटों के दृश्य, सुबह-ए-बनारस, गंगा आरती तथा डमरू, त्रिशूल और ॐ जैसे प्रतीकों का प्रयोग किया गया है। यह स्पष्ट करता है कि भारत अपनी जड़ों से जुड़ा रहकर ही भविष्य की ओर बढ़ रहा है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश यानी पूर्वांचल लंबे समय तक विकास की दौड़ में अपेक्षाकृत पीछे माना जाता रहा। पिछले कुछ वर्षों में सड़क, रेल, हवाई अड्डा तथा पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं ने पर्यटन को नई ऊंचाई प्रदान की है। इस एयर शो से स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ हो रहा है। होटल, होमस्टे, नाविक, छोटे विक्रेता, कारीगर तथा परिवहन से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि हो रही है। लाखों दर्शकों का आना पूर्वांचल को राष्ट्रीय पटल पर नई पहचान दे रहा है। यह संदेश जाता है कि यह क्षेत्र अब हाशिए पर नहीं बल्कि देश की मुख्यधारा में सक्रिय रूप से शामिल है।
जेन-जेड और जेनरेशन अल्फा डिजिटल युग की नई पीढ़ी है। उनके लिए तेजस, राफेल तथा सूर्यकिरण और सारंग टीमों का प्रदर्शन केवल मनोरंजन का विषय नहीं बल्कि करियर और राष्ट्र निर्माण का मार्ग भी है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय सहित पूर्वांचल के अनेक कॉलेजों, इंजीनियरिंग संस्थानों, पॉलिटेक्निक तथा कौशल विकास केंद्रों के छात्रों के लिए यह आसमान एक जीवंत कक्षा बन गया है। रक्षा, एयरोस्पेस, इंजीनियरिंग और विज्ञान-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में युवाओं को प्रेरित करने का यह सुनहरा अवसर है। छोटे कस्बों और गांवों के युवा अब स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि आधुनिक भारत की शक्ति उनके अपने आकाश में भी दिखाई दे सकती है और वे भी उसका हिस्सा बन सकते हैं।
इस शो की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि घनी आबादी वाले पवित्र नदी तट पर सीमित विशेष बुनियादी ढांचे के बावजूद वायुसेना ने इतने बड़े स्तर का जटिल प्रदर्शन सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह साबित करता है कि भारतीय सशस्त्र बल किसी भी परिस्थिति में, कहीं भी, न्यूनतम संसाधनों के साथ पेशेवर दक्षता और परिशुद्धता का परिचय दे सकते हैं। यह क्षमता ही किसी राष्ट्र की असली ताकत होती है।
समग्र रूप से देखा जाए तो विंग्स ओवर गंगा केवल एक एयर शो नहीं बल्कि एक सशक्त राष्ट्रीय बयान है। यह कहता है कि भारत की सैन्य शक्ति उसकी सांस्कृतिक जड़ों से अलग नहीं है। पूर्वांचल विकास की मुख्यधारा में है। युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया जा रहा है। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय सशस्त्र बल इतने सक्षम हैं कि वे किसी भी स्थान पर, किसी भी परिस्थिति में राष्ट्र की रक्षा और गौरव का प्रदर्शन कर सकते हैं। काशी के घाटों पर जब विमानों की गर्जना गंगा की लहरों से टकराती है तो लगता है मानो सनातन और आधुनिक भारत एक साथ आकाश में उड़ान भर रहे हों। यह दृश्य न केवल वर्तमान की ताकत को दर्शाता है बल्कि भविष्य की आकांक्षाओं को भी पंख देता है डॉ. राज कुमार
प्रबंधशास्त्र विशेषज्ञ।
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