पक्का बलुआ घाट गंगा नदी के पास श्रद्धा तर्पण पितरों को पिंडदान जारी। : जमानियां। नगर कस्बा स्थित गंगा नदी पक्का बलुआ घाट पर पितरों का श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान करने का सिलसिला जारी। ब्राह्मण पुजारी उद्धव पांडेय ने बताया कि पितरों को पिंडदान किस स्थान पर श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए और किस जगह पर श्राद्ध करना शुभ माना जाता है। भाद्रपद की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक श्राद्ध पक्ष चलता है। जिसे पितृपक्ष भी कहते हैं। इस दौरान अपने पितरों का श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान करने जा रहे हैं। तो शास्त्रों के अनुसार किस स्थान पर श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए। और किस जगह पर श्राद्ध करना शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया किदेव स्थान किसी मंदिर के भीतर या परिसर में या किसी भी अन्य देवस्थान श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह देवभूमि होती है। पंडित या विद्वान की सलाह पर ही स्थान का चयन करें। ब्राह्मण पुजारी शंभु नाथ पांडेय ने बताया कि किसी भी प्रकार से अपवित्र हो रही भूमि पर भी श्राद्ध नहीं करते हैं। कांटेदार भूमि या बंजर भूमि पर भी श्राद्ध नहीं करना चाहिए। जहां लोग खुले में मल-मूत्र त्यागने जाते हैं वहां भी श्राद्ध नहीं करना चाहिए। भले ही उस भूमि को शुद्ध कर लिया गया हो। उन्होंने बताया कि किसी दूसरे की व्यक्तिगत भूमि पर भी श्राद्ध नहीं करना चहिए। यदि दूसरे के घर या भूमि पर श्राद्ध करना पड़े। तो किराया या दक्षिणा भूस्वामी को दे देना चाहिए। पांडेय ने बताया कि किसी ऐसे शमशान में श्राद्ध नहीं कर सकते हैं। जिसे तीर्थ नहीं माना जाता। देश में कुछ ऐसे श्मशान हैं। जिन्हें तीर्थ माना जाता है। जैसे उज्जैन का चक्रतीर्थ शमशान घाट को तीर्थ का दर्जा प्राप्त है। हालांकि ऐसी जगहों पर श्राद्ध करना मजबूरी हो तो ही करें। वैसे तीर्थ शमशान में श्राद्ध करने के पहले किसी विद्वान से सलाह जरूर लें। पुजारी शंभु नाथ पांडेय ने बताया कि किसी भी पवित्र नदी तट पर उचित समय में विधि-विधान से श्राद्ध किया जा सकता है। और उसी के तहत श्राद्ध करने आने वाले लोग कस्बा स्थित गंगा नदी पक्का बलुआ घाट पर वर्षों से श्राद्ध करते आ रहे है। लोग पितरों की मुक्ति के लिए विशेष श्राद्ध कर्म गंगा नदी के पास किया। फोटोपितरों की पिंडदान श्राद्ध कर्म कराते ब्राह्मण पुजारी शंभूनाथ पांडेय, सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया
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