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*हिंदी दिवस विशेष लेख- नवीन प्रकाश सिंह।**हिंदी : हमारी अस्मिता और अभिव्यक्ति की भाषा*हर साल 14 सितंबर को हम हिंदी दिवस मनाते हैं। यह दिन हमें हमारी मातृभाषा हिंदी की महत्ता और उसकी सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाता है। वर्ष 1949 में संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। तब से यह दिन हमारी राष्ट्रीय पहचान और भाषाई गौरव का प्रतीक बन गया।हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं, विचारों और सपनों की अभिव्यक्ति का माध्यम है। भारत ही नहीं, बल्कि फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद, नेपाल और खाड़ी देशों में भी हिंदी बोलने और समझने वाले बड़ी संख्या में मौजूद हैं। यह विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।आज की दुनिया तकनीक और ग्लोबलाइजेशन से जुड़ी हुई है। ऐसे में हिंदी का महत्व और बढ़ गया है। सोशल मीडिया, सिनेमा, साहित्य, पत्रकारिता और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी की पकड़ मजबूत हो रही है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक कंपनियां भी हिंदी को प्राथमिकता दे रही हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है।हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव के बीच हमें हिंदी के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी निभानी होगी। हिंदी को केवल बोलने की भाषा न मानकर हमें इसे रोजगार, शिक्षा, विज्ञान और तकनीक की भाषा बनाना होगा।हिंदी दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपनी इस मातृभाषा को सम्मान देंगे, इसे आगे बढ़ाएंगे और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी समृद्ध धरोहर को पहुंचाएंगे।*"हिंदी हमारी पहचान है, हिंदी हमारा अभिमान है। नवीन प्रकाश सिंह

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