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माध्यमिक विद्यालयों में देर से आने और पहले चले जाने वाले शिक्षकों व कर्मचारियों की अब खैर नही वाराणसी -- राजकीय और ऐडेड माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति 01 जुलाई से बायोमेट्रिक मशीन के माध्यम से दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया गया है।यह आदेश जारी होते ही शिक्षकों एवं कर्मचारियों की बेचैनी बढ़ गई है। देर से आने और पहले चले जाने वाले शिक्षकों की अब खैर नहीं है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह का आदेश सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को प्राप्त हो चुका है। यह आदेश जिले के जिला विद्यालय निरीक्षक को भी प्राप्त हुआ है।आदेश में कहा गया है कि बायोमेट्रिक मशीन से हुई उपस्थिति की साफ्ट एवं हार्ड कॉपी ईमेल के माध्यम से परिषद और निदेशालय को भेजना अनिवार्य किया गया है। इसी से शिक्षकों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति प्रमाणित की जाएगी। इसके उपरांत ही महीने भर के वेतन को रिलीज किया जाएगा। बीच-बीच में अनुपस्थित रहने वाले शिक्षक एवं कर्मचारियों का उन तिथियों में अनुपस्थिति का उचित कारण या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करने पर वेतन रोक दिया जाएगा। अनुपस्थिति का उचित कारण बताने पर आवेदन को प्रधानाचार्य द्वारा स्वीकृत किया जाना आवश्यक होगा। बिना प्रधानाचार्य के स्वीकृति के अनुपस्थित तिथि का वेतन देय नहीं होगा। वैसे तो बायोमेट्रिक मशीन के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने का आदेश बहुत पहले सन 2016 में भी लागू किया गया था।उस समय सभी राजकीय विद्यालयों ने बायोमेट्रिक मशीन खरीद कर अपने-अपने विद्यालय में लगा भी लिया था और इसके माध्यम से शिक्षकों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति लगना शुरू भी हो गया था। कुछ विद्यालयों में इससे छात्रों की उपस्थिति भी होने लगी थी। लेकिन उसके बाद विभागीय एवं शासन की निष्क्रियता एवं शिथिलता के चलते यह उपस्थिति लगना धीरे- धीरे बन्द हो गया और शिक्षक रजिस्टर पर ही उपस्थिति दर्ज करने लगे।उधर बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की कुछ माह पहले ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने का आदेश शासन से जारी किया गया है। इस उपस्थिति को लेकर शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन भी जारी है। अभी इसका समाधान हुआ भी नहीं कि राजकीय और ऐडेड माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों की बायोमेट्रिक मशीन से उपस्थिति दर्ज कराने का फरमान जारी कर दिया गया है।यह आदेश जारी तो हो गया पर अब देखना है कि इसका क्रियान्वयन कितना हो पाता है। वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता

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