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खुर्शीद के आवास पर मिलादे मुस्तफा कांफ्रेंस आयोजित हुई।जमानियां। सलीम मंसूरी, मोहल्ला चौधरी निवासी खुर्शीद मंसूरी के आवास पर मंगलवार रात को जश्ने ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर मिलादे मुस्तफा कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। मौलाना जुल्फिकार आलम की अध्यक्षता में जलसे की शुरुआत कुरआन की तिलावत से हुई। मौलाना आफताब, मौलाना दिलशेर, मौलाना फिदाउल ने नाते सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। बताया जाता है। कि मंगलवार की रात खुर्शीद मंसूरी के आवास पर जश्ने ईद मिलादुन्नबी के मौके पर मिलादे मुस्तफा कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। जलसे की सदारत मौलाना जुल्फिकार आलम और निजामत मौलाना आफताब ने की। देर शाम जलसे की शुरुआत तिलावते कुरआन से की। इसके बाद नाते पाक का दौर शुरू हुआ। कानूनगोह मोहल्ला स्थित रजाए हबीब मदरसे से आए मौलाना जुल्फिकार ने खिताब पेश किया। और नवी ए कोनेन की हयाते जिंदगी पर रौशनी डाली। मौलाना आफताब ने खिताब करते हुए कौमें मुस्लिम को नसीहतें पेश की और कहा कि अपने बच्चों को दीन की तालीम जरूर दिलाएं। इस अवसर पर दिलशेर तकरीर पेश करते हुए। शरीअत की रौशनी में पहले ये जानले की एहले सुन्नत के नज़्दीक ईदे मिलादुन्नबी मनाना कोई फ़र्ज़ या वाजिब नहीं है। ये मुस्तहब अ'मल है। जो करे उसको शबाब मिलेगा और जो न करे उस पर कोई गुनाह नहीं। उन्होंने अपने तकरीर में बताया कि अब बात ये आती है। की क्या इस्लाम हमें इजाज़त देता है। ईदे मिलादुलनबी मनाया जाए की या नहीं। इसका जवाब ये है। की क़ुरआन हदीश की रौशनी में मिलादुन्नबी मनाना बिलकुल जाइज़ है। और कोई भी दूसरे मसलक का आ'लिम आज तक शरई दलील मिलाद के हराम या नाजाइज़ होने की न आज तक ला सका है और न ला सकेगा। जलसे में एडवोकेट साजिद मंसूरी, मोहम्मद आरिफ मंसूरी, इजहार मंसूरी, इरफान मंसूरी, आदिब मंसूरी, शाहिद जमाल मंसूरी सहित काफी संख्या में मुस्लिम भाई शिरकत किया।

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