वाराणसी दिनांक 29 जून 2025; आज भारतीय गणतंत्र रक्षक संघ द्वारा गोंडवाना वीरांगना महारानी दुर्गावती का 461 वां शौर्य दिवस के अवसर पर संघ के मुख्यालय कंदवा, वाराणसी पर कार्यकर्ताओं द्वारा महारानी को श्रद्धांजली अर्पित की गयी | संघ के वक्ताओं द्वारा बताया गया कि महारानी ने अपने राज्य की संप्रभुता से समझौता नहीं किया | गोंडवाना साम्राज्य मध्य भारत का एक विशाल और समृद्ध साम्राज्य था, जो जबलपुर, सागर, दमोह, सिवनी, मंडला, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, नागपुर, होशंगाबाद, भोपाल, और बिलासपुर तक फैला हुआ था। गोंडवाना एक शक्तिशाली साम्राज्य था। उनके शासनकाल को इतिहासकारों ने अत्यंत कुशल और समृद्ध माना है। अबुल फजल ने अपनी पुस्तक आइना-ए-अकबरी में लिखा है कि दुर्गावती के शासन में गोंडवाना इतना सुव्यवस्थित और समृद्ध था कि प्रजा कर (लगान) स्वर्णमुद्राओं और हाथियों के माध्यम से अदा करती थी। उनके शासन में 23,000 गांवों में से 12,000 गांव सीधे उनके प्रशासन के अधीन थे, जबकि शेष सामंतों के नियंत्रण में थे। दुर्गावती ने अपनी राजधानी को सिंगौरगढ़ किले से स्थानांतरित कर चौरागढ़ किले में स्थापित किया। उनके शासनकाल में गोंडवाना का क्षेत्रफल इंग्लैंड के बराबर हो गया था, जो पूर्व से पश्चिम तक 300 मील और उत्तर से दक्षिण तक 160 मील तक फैला हुआ था। उनकी सेना में 20,000 घुड़सवार, 1,000 युद्ध हाथी, और असंख्य पैदल सैनिक थे। विशेष रूप से, गोंडवाना साम्राज्य भारत का पहला साम्राज्य था, जहाँ महिला सैन्य दस्ते का गठन किया गया था, जिसकी कमान दुर्गावती की बहन कमलावती और पुरागढ़ की राजकुमारी संभालती थीं। महारानी दुर्गावती का जीवन साहस, शौर्य, और स्वाभिमान की एक अनुपम गाथा है। उन्होंने अपने समय की सबसे शक्तिशाली मुग़ल सेना के सामने न झुककर यह सिद्ध किया कि वीरता और बलिदान किसी लिंग या वंश तक सीमित नहीं होता। उनका शासनकाल गोंडवाना के स्वर्णिम युग का प्रतीक था, और उनका बलिदान भारतीय इतिहास में एक अमिट अध्याय है।श्रद्धांजली कार्यक्रम के अध्यक्षता करते हुए अध्यक्ष डॉ. उमेश चन्द्र जी ने वर्त्तमान सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक परिस्थितियों के प्रति चिंता जताई| उन्होंने कहा कि देश में सभी भ्रष्टाचार की जड़ देश की चुनावी व्यवस्था है | उन्होंने कड़े चुनाव सुधार की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्रत्याशी के चुनाव प्रचार को अधिकतम दो लाख में सीमित किया जाय| अचार संहिता के बाद पार्टी स्तर से चुनाव के प्रचार-प्रसार पर पाबंदी लगाई जाय | पार्टियों द्वारा मिथ्या प्रचार-प्रसार से देश का माहौल तनाव ग्रस्त होता है और हिंसा की संभावना बनी रहती है | इस तरह के प्रतिबन्ध से निश्चित रूप से कार्पोरेट जगत का चुनाव में आर्थिक सहयोग की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और आर्थिक भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा | देश की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा | कार्पोरेट जगत का अनर्गल दबाव भी राजनीतिक दलों पर नहीं रहेगा और सरकारें आर्थिक नीति पर प्रभावशाली तरीके से कार्य कर सकती है|महारानी को श्रद्धांजली अर्पित करने वालों में श्री संजीव गौड़, सुभाष साह, विकास वर्मा, राधेश्याम, हंसराज, अशोक कुमार, राम दुलार पाल, अफसर अली, पंचम चौधरी, चन्द्र भूषण प्रसाद, राजकुमार आदि लोग सम्मिलित रहे | कार्यक्रम का संचालन अरुण कुमार वर्मा और धन्यवाद ज्ञापन ब्रिजेश कुमार ने किया | रवि शंकर राय की रिपोर्ट वाराणसी
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