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काशी दीप विजन अमलेश पटेल की रिपोर्ट वाराणसी दिनांक 15 मई, पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर, भारतवर्षीय गोंड आदिवासी महासभा (समिति) और आदिवासी कल्याण समिति के प्रदेश सचिव श्री कृष्ण गोंड जी ने भूटान में दिनांक 10 मई से 13 मई तक आयोजित "एक टिकाऊ और न्यायसंगत भविष्य की ओर: सामाजिक परिवर्तन में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, राजनीति और अर्थशास्त्र की भूमिका" विषय पर सम्पन्न हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से लौट रहे प्रतिभागियों का स्वागत किया। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रायल युनिवर्सिटी भूटान, पारो के नाॅर्बुलिंग रिग्टर काॅलेज और सामाजिक समावेशी अध्ययन केंद्र, सामाजिक विज्ञान विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के द्वारा आयोजित किया गया। सम्मेलन का स्वागत अभिभाषण डॉ. कुनजांग ड्रुक्पा (अध्यक्ष, नॉर्बुलिंग रीग्टर कॉलेज, पारो, भुटान) ने किया, सम्मेलन की प्रस्तावना कांफ्रेंस निदेशक डॉ.अमरनाथ पासवान, सम्मानित अतिथि प्रोफेसर जे.बी. कोमरैयाह, और मुख्य वक्ता प्रोफेसर संजय पासवान पुर्व मंत्री मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार) रहे। मुख्य अतिथि डॉ. टैनडिन दोर्जी जी ने भी सम्मेलन को सम्बोधित किया।सम्मेलन 14 सत्रों में आयोजित किया गया था। जिसमें दो सत्र वर्चुअल सत्र था। वर्चुअल सत्रों की अध्यक्षता प्रोफेसर स्टेफन आनंद (यु.एस.ए) और तनसुख राय केन ( लंदन, यु.के) ने किया। सम्मेलन में उपरोक्त विषय पर आधारित 58 शोध-पत्र पढ़े गये। डॉ. उमेश चन्द्र अध्यक्ष भारतवर्षीय गोंड आदिवासी महासभा (समिति) एवं आदिवासी कल्याण समिति ने जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण नीतियां और वैश्विक सततशीलता पर अपने सहयोगी अंकिता चन्द्रा असिस्टेंट प्रोफेसर भाउ राव देवरस महाविद्यालय, दुद्धी, सोनभद्र द्वारा प्रस्तुत शोध पत्र को पढ़ते हुए कहा कि मानव सभ्यता के लिए बढ़ता हुआ वैश्विक तापमान जलवायु परिवर्तन के लिए गम्भीर चिंतन और नीतियों के किर्यान्वयन का विषय बन चुका है। विकसित देशों और विकासशील देशों की सरकारों की कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति इस चुनौती को और भी गम्भीर बना रही है। सतत विकास लक्ष्य रिपोर्ट 2024 के अनुसार वैश्विक ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि जारी है। जिससे वैश्विक तापमान बढ़ रहा है। पुर्व निर्धारित लक्ष्य जिसमें वैश्विक तापमान की वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस पर रखना था अब इसके बने रहने की सम्भावना 14% ही रह गयी है। ग्रीन हाउस उत्सर्जन पर नियंत्रण वैश्विक विफलता दर्शाती है। कार्बन-डाई-ऑक्साइड समतुल्यता ने नया कृतिमान 57.4 जीगा टन स्थापित कर लिया है जिसमें दो-तिहाई योगदान केवल जीवाश्म ईंधन का ही है, यह बेहद चिंताजनक स्थिति है, इसके बावजूद भी संसार के विकासशील और अविकसित राष्ट्रों में जंगल काटे जा रहे हैं।सम्मेलन का समापन दिनांक 13 मई 2025 को पारो में हुआ।समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रोफेसर संजय पासवान, अध्यक्षता प्रोफेसर वत्सला, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर भुवन राम, आलोक कश्यप, मो. रियाज़ अहमद, स्वागत अभिभाषण प्रोफेसर ल्हातो जाम्बा, समापन सम्बोधन प्रोफेसर कोमरैयाह, संचालन प्रोफेसर सुजीत श्रीवास्तव और धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर अमरनाथ पासवान द्वारा किया गया।उपस्थित प्रतिभागियों ने श्रीकृष्ण गोंड जी का आभार व्यक्त किया।

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