Top News

काशी दीप विजन वाराणसी आदिवासी कांग्रेस उत्तर प्रदेश आप पत्रकार बंधुओं के समक्ष दो मुद्दों पर कांफ्रेंस कर रही है, पहला मुद्दा है प्रदेश में जिला प्रशासन के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा शासनादेशो की अवहेलना कर अपने मर्जी के अनुसार सत्यापन रिपोर्ट लगाकर गोंड और खरवार जाति के सदस्यों को अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने में बाधा डाल रहे हैं और इन जातियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखने का षडयंत्र कर रहे है | इस तरह से उपरोक्त जातियां संरचनात्मक हिंसा की शिकार बन रही है | पूर्वांचल के सभी जिलों में उपरोक्त जातियों के सदस्यों को जाति प्रमाण पत्र के लिए धरना-प्रदर्शन करना पड़ा है लेकिन जिला प्रशासन की हठधर्मिता के चलते आज तक प्रमाण पत्र सुचारू ढंग से जारी नहीं हो पाया है | जिला प्रशासन कभी-कभार दो-चार प्रमाण पत्र इसलिए जारी कर देता है कि उनसे पूछे जाने पर वो कह सकें कि हम जांचोपरांत प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं | उपरोक्त के सम्बन्ध में समाज कल्याण अनुभाग-03 द्वारा जारी शासनादेश संख्या 417 मंत्री/26-3-2019 दिनांक 21 जनवरी 2020; संख्या 129/2021/3206/26-3-2021 दिनांक 03.11.2021; संख्या-01सांसद/26-3-2022 दिनांक 01 सितम्बर 2022 एवं संख्या- 3497/26-3-2024-3(28)/78 दिनांक 02 दिसंबर 2024 को संदर्भित किया जा सकता है | आयुक्त सचिव राजस्व परिषद अनुभाग-4 द्वारा शासनादेश संख्या जी-144/4-149ए/ 2017 (टी.सी) दिनांक 22 मार्च 2021 जो समस्त मंडलायुक्त एवं समस्त जिलाधिकारी उत्तर प्रदेश को संबोधित है, जिसमें स्वैच्छिक तरीके से गलत सत्यापन रिपोर्ट ना लगाकर सुसंगत शासनादेशों के क्रम में विधि अनुरूप जाति प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए गए हैं | लेकिन सक्षम प्राधिकारी शासनादेशों का अक्षरशः पालन नहीं कर रहें हैं और स्वेच्छाचार में लिप्त हैं | बलिया जिले में गोंड और खरवार समाज पिछले 120 दिनों से शांतिपूर्ण आन्दोलन कर रहा है | तत्कालीन जिलाधिकारी ने शासन से प्रमाण पत्र जारी करने हेतु मार्ग दर्शन की अपेक्षा की थी जिसका जवाब 22 मई को आया उसके पहले ही जिलाधिकारी महोदय का स्थानान्तरण हो गया | मार्ग दर्शन में उन्हें शासनादेश सं. 129 दिनांक 3/11/2021 का पालन करने हेतु कहा गया है | जब कि इस शासनदेश के पालन हेतु दिसंबर महीने में शासनादेश सं. 3497 दिनांक 02 दिसंबर 2024 को भी जारी हो चूका था | सवाल यह है कि क्या प्राधिकृत अधिकारी शासनादेशों का पालन सुनिश्चित करेंगे ? इस तरह से स्वेच्छाचार की समस्या पुरे पूर्वांचल में बनी हुई है, इसका समाधान क्या है ? क्या समस्या की जड़ उत्तर प्रदेश शासन में है अथवा जिलाप्रशासन के प्राधिकृत अधिकारियों में है ? इसका समाधान क्या है? हमारी मांग है कि उत्तर प्रदेश शासन इस मामले को प्रति संवेदनशील बने और गोपनीय जांच कराकर जिला प्रशासन के दोषी अधिकारियों के विरुद्ध प्रशासनिक करवाई सुनिश्चित करे |2. दूसरा मुद्दा छत्तीसगढ़ राज्य के हसदेव अरण्य, जलवायु परिवर्तन और सरकार की नीतियों का है | एक तरफ संयुक्त राष्ट्र विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त पर आदिवासियों को पृथ्वी का रक्षक बताता है, उनकी रूढ़ियाँ और परम्पराओं को प्रकृति का संरक्षण करने वाला बताता है और उनसे उनकी रूढ़ियाँ और परम्पराओं को संरक्षित रखने की अपेक्षा भी रखता है | विकासशील और अल्पविकसित देशों में खनन का कार्य तेजी से बढ़ा है | डाउन टू अर्थ के 4 जनवरी 2024 के रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ का हसदेव जंगल 1.7 लाख हेक्टेयर में है वहां के जंगलों की कटाई हो रही है| अब तक 137 हेक्टेयर जंगल कट चुके हैं | यह कटाई 2021 से चल रही है, 2023 से इसमें तेजी आई है | रिपोर्ट के अनुसार पीईकेबी की कोयला खनन क्षमता क्रमशः 2 करोड़ टन प्रति वर्ष है। इनमें परसा में 50 लाख टन और कांटा में 70 लाख टन सालाना होगी। उन्होंने कहा, "इस प्रक्रिया में कुल आठ लाख पेड़ काटे जाएंगे।" घने वन क्षेत्र के नीचे कुल पांच अरब टन कोयला होने का अनुमान है। आदिवासी और ग्रामीण बार-बार विरोध मार्च निकाल रहे हैं और अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं और यहां तक कि उन्हें 2021 से वनों की कटाई करने से भी रोक रहे हैं, लेकिन कटाई चल रही है| इस वर्ष जारी सतत विकास लक्ष्य (SDG) 2024 की रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन और भी विकराल चुनौती के रूप में मानव सभ्यता के सामने खड़ा है | रिपोर्ट के अनुसार :• 2023 में जलवायु संकट वास्तविक समय में तेजी से बढ़ा। बढ़ते तापमान में कमी नहीं आई है और वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि जारी है। जीवाश्म ईंधन सब्सिडी ($1.53 ट्रिलियन) रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई।• वर्तमान में तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने की संभावना केवल 14% है | वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारी कमी 2030 तक होनी चाहिए और 2050 तक शून्य तक पहुँचना चाहिए। इस रिपोर्ट ने UNPEG रिपोर्ट 2023 के हवाले से बताया है कि 2022 में वैश्विक ग्रीन हॉउस गैसों का उत्सर्जन एक CO2 समतुल्य 57.4 गीगाटन हो गया है जिसमें दो तिहाई CO2 केवल जीवाश्म ईधन और औद्योगिक प्रकिया से उत्पन हुआ है | इसमें परिवहन शामिल नहीं है | प्रश्न यह उठता है कि कोयला भी एक जीवाश्म ईधन है | पर्यावरण में 5 अरब टन कोयला जलने के बाद ग्रीन हॉउस गैस उत्सर्जन और समतुल्य CO2 के बढ़ने से भूमंडलीय तापमान की स्थिति क्या होगी, जबकि SDG रिपोर्ट 2024 ने वैश्विक तापमान को 1.50 सेल्सियस पर बने रहने की संभावना मात्र 14% ही बताया है | क्या भारत के लिए यह चिंतनीय विषय नहीं है ? क्या भारत की राजनीतिक इच्छा शक्ति भूमंडलीय तापमान और जलवायु परिवर्तन के विषय पर कमजोर पड़ चूका है? आदिवासी कैसे अपने पर्यावरण कि रक्षा करे जब सरकार ही पर्यावरण को नष्ट करने पर अमादा है ? अतः सतत विकास और मानव सभ्यता को सुरक्षित बनाये रखने के लिए आवश्यक है कि भारत में खनन को प्रतिबंधित करते हुए केवल भारत की आवश्यकतानुसार अनुमति दी जाय और ऐसे परियोजनाओं के शुरू करने के पूर्व विस्थापित होने वाली आबादी के पुनर्स्थापन की पर्याप्त व्यवस्था की जाय | हमारी मांग है कि हसदेव अरण्य जिसे मध्य भारत का फेफड़ा कहा जाता है उसके खनन पर रोक लगाई जाय | इस कांफ्रेंस का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के गोंड और खरवार जाति जो कि कतिपय जनपदों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में सूचीबद्ध है उनकी समस्या और राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन की समस्या को प्रेस वार्ता के माध्यम से जनता और सरकार के समक्ष आवश्यक करवाई हेतु उठाना है | (डॉ. उमेश चन्द्र) प्रदेश अध्यक्ष आदिवासी कांग्रेस उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी

Post a Comment

और नया पुराने