कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट
वाराणसी,भारतीय संस्कृति में अन्नदान को महादान माना गया है। भूखे को भोजन कराना केवल पुण्य का कार्य नहीं, बल्कि मानवता, करुणा, दया और परोपकार का सर्वोत्तम उदाहरण है। इसी पवित्र भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से श्री नित्य निकुंज रस सेवा संस्थान ट्रस्ट, वृंदावन, सुसुवाही, वाराणसी की ओर से ग्राम टिकरी में अन्नदान एवं अन्न वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान जरूरतमंदों और वंचित परिवारों तक सेवा और सहयोग पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
संस्थान के अध्यक्ष नित्यानन्द पाण्डेय महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अन्न को ब्रह्म का स्वरूप माना गया है। तैत्तिरीय उपनिषद में भी कहा गया है, “अन्नं न निन्द्यात्”, अर्थात अन्न का अनादर नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य समाज में किसी भी व्यक्ति को भूखा न रहने देना तथा आर्थिक रूप से कमजोर, वृद्ध, असहाय और वंचित परिवारों की यथासंभव सहायता करना है,संस्थान अन्न वितरण के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक और जनकल्याणकारी कार्यों को भी आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने समाज के प्रबुद्ध नागरिकों, समाजसेवियों, धर्मप्रेमियों और दानदाताओं से अपील की कि वे संस्थान के सेवा कार्यों में यथाशक्ति सहयोग करें, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाई जा सके।
गरीब एवं असहाय कन्याओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से निःशुल्क सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण तथा कंप्यूटर शिक्षा की व्यवस्था जल्द शुरू करने की घोषणा की। इसके साथ ही बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना भी बताई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के जरूरतमंद लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए संस्थान अपनी क्षमता के अनुसार हरसंभव सहयोग करेगा।
संस्थान के उपाध्यक्ष अखिलेश पटेल ने कहा कि अन्नदान की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा और सहयोग पहुंचाना ही संस्थान का प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि मानव सेवा ही नारायण सेवा है और जरूरतमंदों की सहायता करना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है।
कार्यक्रम में उपाध्यक्ष शशि सिंह, महामंत्री भगवानदास, व्यवस्थापक मंत्री अनिल पटेल, संस्थान के पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य तथा क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।संस्थान की ओर से कहा गया कि अन्नदान केवल भोजन उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, सद्भाव, समानता और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने का एक पवित्र अभियान है।
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