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काशी दीप विजन राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्र में आपका स्वागत है जीत की खुशी में यह पैगाम आया ह ैमुझे अपनों ने लूटा, गैरों में कहाँ दम था,मेरी लालटेन जो टूटी—यूँ नहीं, वहाँ यूपी में बम था।जहाँ सीना मोम जैसा, वहाँ पत्थर भी पिघल जाते,यहाँ रिश्तों का बाज़ार था, हर सौदे में ज़हर कम था।हमने सच्चाई की बातें कीं, मगर उनकी अदालत में,हर सच्चे लफ़्ज़ के पीछे कोई झूठा-सा मौसम था।वो कहते थे रहबर हैं, हमें राह दिखाते हैं,हम चलते ही रहे, बाद में मालूम हुआ—रास्ता ग़म था।चिराग़ अपने जले तो धुआँ घरों में भर आया,कभी सोचा ही न था कि हवा का रुख इतना बेरहम था।रितु गोंड की रिपोर्ट वाराणसी👍👍🙏

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