लद्दाख में युवा सड़कों पर — सोनम वांगचुक के समर्थन में इंसाफ की मांग। रिपोर्ट: नवीन प्रकाश सिंह।लद्दाख / नई दिल्ली, 29 सितंबर 2025 — केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में युवाओं ने सड़कों पर उतरकर इंसाफ की मांग की है, और यह आंदोलन विशेष रूप से सोनम वांगचुक के समर्थन में किया जा रहा है। #hailighteveryone #SonamWangchuk #JagrukBharat #Ladhak #alfalovers #jashtish जैसे हैशटैग सामाजिक मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जो इस आंदोलन की आग को और भड़काए हुए हैं।घटनाक्रम का संक्षिप्त विवरणहिंसा और गिरफ्तारियाँ24 सितंबर को लद्दाख के लेह में प्रदर्शन शांतिपूर्ण शुरुआत के बाद हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई, जिसमें कम से कम 4 लोगों की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए। पुलिस ने सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेजा। आरोप और स्पष्टीकरणलद्दाख पुलिस महानिदेशक ने आरोप लगाया है कि वांगचुक ने स्थानीय शांति चर्चाओं को बाधित किया और “भड़काऊ बयानों” से हिंसा भड़काई। दूसरी ओर, वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि उन पर लगाए गए पाकिस्तान लिंक और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप निराधार हैं। स्थानीय जनता और युवा प्रतिरोधवांगचुक के समर्थन में लद्दाख के युवा, विशेष रूप से लेह में अनेक लोग तिरंगा लेकर जेल के बाहर पहुंच गए। आंदोलन की मांगों में प्रमुख है लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान करना और उसे भारत के संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करना, ताकि स्थानीय संस्कृति और संसाधनों की रक्षा हो सके। राजनीतिक प्रतिध्वनि और समर्थनकांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वांगचुक के समर्थन में मोर्चा खोला है। उन्होंने केंद्र सरकार पर लद्दाख की संस्कृति और लोगों पर हमला करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चार लोगों की हत्या और वांगचुक की गिरफ्तारियों से केंद्र का रवैया भारी विवादों में फँसा है। हिमालय नीति अभियान (Himalaya Niti Abhiyan) ने भी इस शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन किया है। किसान मोर्चा (SKM) ने वांगचुक की रिहाई और NSA रद्द करने की मांग की है। मांगें और चुनौतियाँप्रमुख मांगें:1. राज्यhood (पूर्ण राज्य दर्जा) — लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश नहीं बल्कि राज्य का दर्जा दिया जाए।2. छठी अनुसूची में सम्मिलन — ताकि स्थानीय स्वशासन, पारंपरिक अधिकार एवं संसाधन प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।3. स्थानीय आरक्षण और नौकरियों में प्राथमिकता — लद्दाख के मूल निवासियों को सरकारी नौकरियों और भूमि अधिकारों में संरक्षण।4. अवैध आरोपों की वापसी एवं वांगचुक की रिहाई — उन पर लगाए गए आरोपों की पारदर्शी जांच और यदि बेबुनियाद हों तो रद्द किया जाना।चुनौतियाँ और विवाद:सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने सामाजिक तनाव पैदा किया, और प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। विरोधियों का यह कहना है कि आंदोलन को उकसाने में विदेशों से फंडिंग या बाहरी एजेंडों का हाथ हो सकता है। मीडिया में वांगchuk को “देशद्रोही” के रूप में दर्शाने का आरोप भी लग रहा है, जिससे आंदोलन की लोक-मान्यता विवादास्पद हो गई है। प्रशासन ने वांगचuk के NGO SECMOL का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया है। लद्दाख में यह संघर्ष केवल एक व्यक्ति (सोनम वांगचुक) की गिरफ्तारी या समर्थन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आंदोलन लद्दाख की पहचान, संसाधनों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा बन गया है। युवा वर्ग इस संकट को धैर्य, संघर्ष और मजबूर आवाज के रूप में प्रयोग कर रहा है।सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद और क्षिप्र निष्पक्ष जांच ही आगे की राह हो सकती है, ताकि हिंसा न बढ़े और मूल समस्याओं का समाधान हो सके।
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