वाराणसी, काशीदीप विजन,जय सेवा 🙏जय बड़ादेव 🙏 जय गोंडवाना आज कुड़ी बाजार , वाराणसी में 18 सितंबर 2025 कोगोंड महाराजा शंकर शाह मरावी और पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह मरावी का बलिदान दिवस मनाया गया, सबसे पहले महिला मोर्चा के सुनीता गोंड, रेनू गोंड, कमला गोंड,लालमणि गोंड मीरा गोंड, सीतामणी गोंड ने बलिदानी महाराजा शंकर शाह मरावी,कुंवर रघुनाथ मरावी के शैल चित्र पर माल्यार्पण कर द्वीप प्रज्वलित कर , समाज ,देश के सुख समृद्धि हेतु इष्ट देव बड़ादेव का सुमरन कि, उसके बाद अतिथि सुक्खू सिंह मरावी, राकेश सिंह मरावी मुरारी गोंड, विनोद शाह, शिवजतन गोंड, ओमप्रकाश गोंड, चहेतु गोंड, उमाशंकर गोंड , संतोष गोंड, चंद्र मोहनगोंड शंकर गोंड, राजिंदर गोंड विजय गोंड, धरमू गोंड, ग्वालू गोंड, मन्ना गोंड, पवन गोंड, जितेंद्र गोंड, एवं सभी उपस्थित सगा जनों ने पुष्प अर्पण किए, ग्वालू गोंड अर्जुन गोंड की गोड़ी नृत्य टीम ने सभा में रौनक बिखेरने का काम किए, वक्ता, सुक्खू सिंह मरावी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी युवा मोर्चा अध्यक्ष नेअपने वक्तव्य में बताए कि 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में प्रथम आवाज ए बुलंद करने वाले गोंड आदिवासी समुदाय ही है, वही महाराजा शंकर शाह ने अपनी कलम और कविताओं से अंग्रेजों के खिलाफ जनजागरण की ऐसी चिंगारी पैदा की थी, जिसने पूरे देश भर में क्रांति खड़ा कर दिया । राजा शंकर शाह कवि-हृदय , सशक्त राजा थे। उन्होंने अपनी कविताओं में ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों का चित्रण किया और देश की जनता को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। उनकी कविताएँ से अंग्रेजों को डर था कि राजा शंकर शाह की कविताएँ और गीत, क्रांति की आग को और भड़काएँगे। जिसकी क्रूरता अंग्रेजो ने इतनी भयानक रूप से राजा के पुत्र रघुनाथ शाह सहित 18 सितंबर 1857 को तोप के मुँह से बाँधकर शहीद कर दिया गया। क्योंकि राजा शंकर शाह की कलम तलवार से भी ज्यादा असरदार थीं और अंग्रेजी हुकूमत का सबसे बड़ा "सबूत" बनीं। आज भी उनका बलिदान हमें यह सिखाता है कि –अपने हक़ और आज़ादी के लिए आवाज़ उठाना जरूरी है।, चाहे कितना भी बड़ा अत्याचारी सामने क्यों न हो, सत्य और साहस से उसका सामना किया जा सकता है। वक्ता संतोष गोंड ने समाज को एकजुट रहने और गोंडी संस्कृति पर फोकस करने पर विचार दिए, कार्यक्रम अध्यक्ष मुरारी गोंड, कार्यक्रम संचालक ओमप्रकाश गोंड, व्यवस्थापक जितेंद्र गोंड, मन्ना गोंड, शिवकुमार गोंड, राजेंद्र गोंड, अनिकेत गोंड, मोनू, आनंद गोंड, रोहित रोहन गोंड, पवन गोंड, रविन्द्र गोंड, संदीप गोंड में किए, वही कार्यक्रम की धन्यवाद ज्ञापन ओमप्रकाश गोंड ने अपने ओजस्वी विचारों से किए, दिनेश कुमार गोंड की रिपोर्ट
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