काठमांडू, नेपाल11 सितंबर 2025नेपाल सरकार ने 4 सितंबर 2025 को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की नई नियमावली के तहत लगभग 26 सोशल मीडिया ऐप्स को बंद करने का आदेश जारी किया। इसके आरोप government's दावों के अनुसार ये प्लेटफ़ॉर्म स्थानीय कानूनों के अनुसार पंजीकरण नहीं करवाए, लाइसेंस नहीं लिए गए, तथा राष्ट्रीय संपर्क कार्यालय (liaison office) और शिकायत निवारण (grievance redressal) के प्रावधानों को पूरी तरह से लागू नहीं किया। इसमें शामिल प्लेटफ़ार्मों में Facebook, Instagram, WhatsApp, YouTube, X (पूर्व में Twitter), LinkedIn, Reddit आदि प्रमुख नाम हैं। चीनी ऐप्स जैसे कि TikTok, Viber आदि को इस बैन से नहीं जोड़ा गया क्योंकि उन्होंने समय रहते पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर ली थी। *नतीजों व उत्पन्न विवाद*1. जनता का व्यापक विरोध (Gen Z आंदोलन)युवा वर्ग — जिसे “Generation Z” कहा जा रहा है — इस कदम को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मानते हुए सड़कों पर उतर गया। 2. प्रदर्शन एवं हिंसाविरोध के दौरान कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने रबर बुलेट, वाटर कैनन, आंसू गैस आदि का प्रयोग किया। कुछ जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। 3. मृत्यु व चोटविरोध-प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 19 लोगों की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए। 4. प्रभावी लीं राहतगलती के बाद सरकार ने बैन को वापस लेने की घोषणा की। इसके अलावा गृह मंत्री समेत कुछ उच्च सरकारी अधिकारी इस्तीफा देने को मजबूर हुए। 5. संवैधानिक व मानवाधिकार चिंताएँआलोचकों ने यह कहा कि सरकार की यह कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सूचना का अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। *कारण और पीछे की राजनीतिक पृष्ठभूमि*सरकार का दावा: इस बैन का उद्देश्य फर्जी खबरें, आनलाइन अपराध, घृणास्पद भाषण और गलत सूचना के प्रसार को नियंत्रित करना है। समय सीमा: सोशल मीडिया कंपनियों को 7 दिन का समय दिया गया था कि वे स्थानीय पंजीकरण पूरा करें, शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करें और एक स्थानीय संपर्क कार्यालय नियुक्त करें। जिन्होंने ये नहीं किया, उन्हें बैन का नोटिस मिला। नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगे इस बैन ने सरकार और जनता के बीच एक बड़ा संघर्ष पैदा किया है। मामला सिर्फ तकनीकी नियमों का नहीं रहा — इसने युवाओं की नाराज़गी, राजनीतिक पारदर्शिता की मांग, न्याय की अपेक्षाएँ और सरकार पर बढ़ती आलोचना को भड़काया है।सरकार ने बैन वापस लिया है, लेकिन प्रभाव दूरगामी लगते हैं:जनता में भरोसा अब कम हो गया है।विरोध-आंदोलन Gen Z नाम की युवा पीढ़ी की आवाज़ बनकर उभरा है।भविष्य में ऐसी नीति बनाने में सरकार को जनसंवाद और संवेदनशीलता बरतनी पड़ेगी। रिपोर्ट नवीन प्रकाश सिंह।
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