विश्व में सुख शाति समृद्धि हेतु गोंड आदिवासियों ने किया महा गोगो यज्ञ एवं मनाया विश्व आदिवासी दिवसआज 9 अगस्त 2025 को वाराणसी के शास्त्री घाट कचहरी पर गोंड आदिवासी, मूलनिवासी समुदाय विश्व आदिवासी दिवस बड़े धूम धाम से मनाया, शास्त्री घाट पर विश्व में सुख शांति, समृद्धि हेतु गोही संस्कृति रिताज से महा गोगो यज्ञ किए, एवं झारखंड राज्य, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक, पूर्व मुख्य मंत्री दिशोग गुरु शिबू सोरेन के दिवंगत होने पर सभा ने 2 मिनट का मौन धारण कर शोक संवेदना व्यक्त कर अंतिम सेवा जोहार किये,कार्यक्रम के संचालक विनोद शाह मरकाम एवं व्यवस्थापक राकेश सिंह मरावी ने गोगो के वाद सभा स्थल से झाँकी आदिवासी पद्धति से निकलते हुवे कचहरी। चौराहा होते वापस डॉ. भीम राव अम्बेडकर जी के मूर्ति पर सभी अतिथि माल्यार्पण करते जयघोष के साथ शामिल हो गए, उसके बाद लोग राभा रचल पर पहुँच गए अतिथियों का सम्मान कमेटी ने मिलकर किया, अतिथियों को अंगतरत्र, मोमेंटो, पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया ।अध्यक्षता कर रहे सुक्खू सिंह मरावी ने आए हुवे सभी लोगो का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त करते हुये कहा कि आदिवासियों को हक अधिकार दिलाने और उनकी समस्याओं का निराकरण, भाषा, संस्कृति, इतिहास के सरक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की महासभा द्वारा 9 अगस्त 1994 को प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय आदिवासी/मूलनिवासी दिवस सम्मेलन का आयोजित किया गया।भारत में, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता। अधिनियम 2006 (FRA) 5वी अनुसूची क्षेत्र, जैसे कानून बनाए गए हैं, इस वर्ष विश्व स्वदेशी दिवस की थीम 2025आदिवासी लोगों का आत्मनिर्णय का अधिकार, खाद्य सुरक्षा और संप्रभुता का मार्ग स्वदेशी समुदायों की बाहरी हस्तक्षेप के बिना अपनी भूमि और संसाधनों पर शासन करने का अधिकार। पारंपरिक कृषि पद्धतियों का महत्व तथा खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका वैश्विकता रखी जैव विविधता संरक्षण और जलवायु लचीलेपन से निपटने के लिए स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को मूल्यवान सति के रूप में मान्यता का देना, वक्ता मा० श्री कैलाश नाथ सोनकर, पूर्व विधायक, समाजसेवी ने अपने अभिभाषण में कहा कि आज भी आदिवासी समाज आर्थिक सामाजिक, शैक्षिक रूप से पीछे है इनको मुख्य धारा में लाना हम सबका परम कर्तव्य है. वहीं डॉ. आर.एस. पटेल, राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार सेना, समाजसेवी ने कहा कि आज तक आदिवासी मूलनिवासी समाज के ऊपर अत्याचार हो रहे है, आए दिन हत्याएं हो रही है आज हम सब मिलकर संकल्प लेते है कि जहां किसी गरीब असहाय को कष्ट हो मिलकर सहयोग करेंगे,, सभा ने राष्ट्रपति मुख्यमंत्री जी के समक्ष द्वारा जिलाधिकारी को कुछ मांग पत्र सौंपे जिसमे ।1- आजादी की अमृत महोत्सव एवं नई शिक्षा नीति 2020 के अन्तर्गत विश्व आदिवासी दिवस एवं प्रदेश के आदिवासी महापुरुषों की व्यक्तित्व एवं कृतित्व को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।2- केंद्र की भाति उत्तर प्रदेश में राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया जाए, ताकि जनजाति समुदाय का विकाश सुनिश्चित हो सके,3- प्रदेश सरकार द्वारा नए अध्यादेश एवं नीति के माध्यम से गैर एससीधएसटी को वेची जा रही भूमि सम्वन्धी आदेश को निरस्त कर पूर्व नीति को बहाल किया जाए, तोंकि कमजोर आदिवासी समाज को गुमराह कर क्रय-विक्रय पर तत्काल रोक लगे जिससे आदिवासी समाज को भूमिहीन बनने से रोका जाए।4- आदिवासी बाहुल्य जनपद वाराणसी में सास्कृतिक एवं सामाजिक ऐतिहासिक आयामों के विकास और संरक्षण हेतु आदिवासी संग्रहालय, प्रेक्षागृह का निर्माण एवं अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकाश निगम की स्थापना किया जाए।5- उत्तर प्रदेश के आदिवासी स्वाधीनता संग्राम सेनानी की व्यक्त्तिव एवं कृतित्व की पुस्तक प्रकाशन को एवं आदिम गोंडी भाषा बोली को नई शिक्षा नीति 2020 में शामिल कर विकास किया जाए।6- समय-समय पर जनजाति समाज में अन्य जाति एवं समुदाय के लोग कूट रचना के माध्यम से जनजाति वर्ग का लाभ प्राप्त कर लेते है जिसे रोकन हेतु जनपद स्तर पर जिलाधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) के माध्यम से आदिवासी परिवार की सर्वे कर पंजीयन रजिस्टर में दर्ज किया आए।7- प्रदेश के आदिवासी समाज की अति प्राचीन भोजली (कजरी) पर्व जात्रा एवं अन्य पडूम (त्योहार) पेनठाना (प्रकृति शक्ति स्थल) मिट्टी संस्कार स्थल चयन आदि का सर्वेक्षण कर सूचीबद्ध कर उनके विकास और संक्षण हेतु महोत्सव मेला आदि का आयोजन किया जाय सभा में व्यवस्था सहयोगी लालबहादुर गोत चहेतु गोड नेता, शिवजतन गोंड, उगाशंकर गोंड उर्फ राजू, कैलाश गोंड, रामजतन गॉड, चन्द्रमोहन गौह ओमप्रकाश गोंड, सन्तोष सिंह मरकाम, सन्तोष गोंड (जिलाध्यक्ष गोंड महासभा), मनीष कालरा समाज सेवी राहुल गांड, विरेन्द्र मरावी, सोनू मरावी (जी.एस.यू. प्र.अ.), रामलखन गोंड, आनन्द गोंड, दिनेश गोड (प्रधान) दिना गोंड, गब्बर गोंड, भाई लाल एवं अन्य सभी सगाजन उपस्थित रहें।
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