प्रबन्ध निदेशक कार्यालय पर ध्वजारोहण कार्यक्रम हेतु बटेंगी रुपया215863 की मिठाईया और जिस क्षेत्र से राजस्व आता है वहाँ के कर्मचारी चंदा लगाकर मिठाई खरीदने को मजबूर संघर्ष समिति ने असमान /अपारदर्शी व्यवहार का लगाया आरोप**बनारस के बिजलिकर्मियो ने निजीकरण के विरोध में विरोध सभा के बाद प्रबन्ध निदेशक कार्यालय तक निकाली तिरंगा रैली : विधान सभा में विजन - 2047 में बिजली व्यवस्था में सुधार की चर्चा के बाद निजीकरण का अध्याय तुरंत बन्द करने की मांग :* *वाराणासी-14अगस्त।* विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ0प्र0 के बैनर तले आज बनारस के बिजलिकर्मियो ने भिखारीपुर स्थित प्रबन्ध निदेशक कार्यालय पर विरोध सभा के साथ तिरंगा रैली निकाले जिसमे बिजलिकर्मियो ने "निजीकरण मुर्दाबाद", "बिजली का निजीकरण बन्द करो" आदि के तख्तियां के साथ हाथों में तिरंगा लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। वक्ताओ ने बताया कि कल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर डिस्कॉम मुख्यालय द्वारा अपने लिए बेहतरीन मिठाईयो का किया प्रबन्ध जिसके तहत प्रबन्ध निदेशक कार्यालय पर ध्वजारोहण कार्यक्रम में मिठाई बांटने हेतु रुपया215863 की मिठाईयो सहित अन्य हेतु किया आर्डर और जिस क्षेत्र से राजस्व आता है वहाँ के कर्मचारी चंदा लगाकर मिठाई खरीदने को मजबूर क्योंकि किसी भी विधुत उपकेंद्र या कार्यालय हेतु नही हुआ कोई आदेश जिसपर संघर्ष समिति ने असमान /अपारदर्शी व्यवहार बताते हुए लगाया आरोप। वक्ताओ ने कहा है कि उप्र विधान सभा में रखे गये विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश विजन-2047 में बिजली व्यवस्था में लगातार हो रहे सुधार की विस्तृत चर्चा की गयी है ऐसे में जब सार्वजनिक क्षेत्र में उप्र में बिजली व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। काकोरी क्रांति के 100 वर्ष पूरे होने पर 08 अगस्त से प्रारम्भ कर तिरंगा सभा अभियान के समापन पर आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर तिरंगा रैली निकाल कर निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की। राजधानी लखनऊ में बिजली कर्मी राणा प्रताप मार्ग स्थित हाईडिल फील्ड हॉस्टल पर एकत्र होकर हाथ में तिरंगा लिये हुए जीपीओ पार्क स्थित काकोरी क्रांति स्मारक तक रैली के रूप में गये। संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियो ने बताया कि अवैध ढंग से नियुक्त झूठा शपथ पत्र देने वाले ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन की मदद से पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल और निदेशक वित्त निधि नारंग द्वारा तैयार कराये गये निजीकरण के दस्तावेज के अनुसार निजीकरण के बाद भी प्रदेश सरकार को निजी कम्पनियों को सस्ती दर पर बिजली मुहैया करानी पड़ेगी जिसका भार सरकार उठायेगी। इसके अतिरिक्त सरकार को वित्तीय मदद भी करनी पड़ेगी। यह सब भार उप्र सरकार उठायेगी। सवाल यह है कि निजीकरण के ऐसे प्रयोग से उप्र को क्या मिलने वाला है ? संघर्ष समिति ने कहा कि उल्लेखनीय है कि निजीकरण के पीछे मुख्य कारण घाटा बताया जा रहा है जो पूरी तरह गलत है और पॉवर कारपोरेशन झूठे आकड़ों के आधार पर घाटा बता रहा है। इसके अतिरिक्त किसानों, बुनकरों आदि को मिलने वाली सब्सिडी और सरकारी विभागों के राजस्व बकाये को भी पॉवर कारपोरेशन घाटे में जोड़कर दिखा रहा है। संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मियों का मुख्य उद्देश्य हर घर हर गांव तक सस्ती बिजली पहुंचाना है। बिजली कर्मी सीमित संसाधनों के बावजूद उत्तर प्रदेश के 3 करोड़ 63 लाख उपभोक्ताओं तक निर्बाध बिजली आपूर्ति का कार्य कर रहे हैं। विगत 08 वर्षों में एटी एण्ड सी हानियां 42 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत पर आ गयी हैं जो राष्ट्रीय मापदण्ड है। एटी एण्ड सी हानियों में चालू वित्तीय वर्ष में और कमी आने की सम्भावना है। ऐसे में राष्ट्रीय मानक के अनुसार पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण करने का कोई औचित्य नहीं है। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मी तिरंगा लेकर निजीकरण के विरोध में निकले। बिजली कर्मियों के हाथ में तख्तियां थीं जिनपर लिखा था कि निजीकरण का निर्णय निरस्त करो, विकसित भारत के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर बनाये रखना जरूरी है। सभा की अध्यक्षता ई0मायाशंकर तिवारी एवं संचालन अंकुर पाण्डेय ने किया। सभा को सर्वश्री ई0एस0के0सिंह,ई0 नवदीप सैनी,ई0 अभिषेक मौर्य,राजेन्द्र सिंह,दीपक गुप्ता,संदीप कुमार, ,सतीश बिंद, राजेश सिंह,नवीन कुमार,गजेंद्र श्रीवास्तव, रंजीत पटेल,जयप्रकाश, पंकज यादव,रंजीत कुमार, राजेश पटेल,जितेंद्र सिंह, आदि ने संबोधित किया। *(अंकुर पाण्डेय)मीडिया सचिव/प्रभारीविधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ0प्र0,वाराणासी।
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