[24/05, 1:01 pm] UMAS.G0ND.PRMHS: उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जिलाधिकारी बलिया को स्पष्टीकरण पत्र संख्या 1304/ 26-3-2025/ 1690967 दिनांक 22 मई 2025 जारी किया गया है। यह स्पष्टीकरण जिलाधिकारी बलिया द्वारा उनके पत्र 806/प्र.पत्र/गोंड/2025 दिनांक 21अप्रैल 2025 द्वारा मार्गदर्शन मांगे जाने पर दिया गया है। यह मार्गदर्शन भी निदेशक अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान लखनऊ के पत्र दिनांक 14/05/2025 के आधार पर दिया गया है।क्या बलिया के जिलाधिकारी/ मुख्य राजस्व अधिकारी/ उपजिलाधिकारी/ तहसीलदारों को उपरोक्त शासनादेशों की जानकारी नहीं थी अथवा इन शासनादेशों की भाषा अस्पष्ट है जो बलिया के जिलाधिकारी ने शासन से मार्गदर्शन मांगा था?115 दिन के संघर्ष का परिणाम यही मार्गदर्शन पत्र है।एक भारतीय प्रशासनिक अधिकारी यदि शासनादेशों की भाषा न समझ पाये, यह भी एक रहस्य बन जाता है। मार्गदर्शन का मांगा जाना अर्थात समस्या जिला प्रशासन में नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश शासन में है और यह स्पष्ट हो जाता है कि समस्या योगी सरकार ने खड़ी कर रखी है और जिला प्रशासन मूक-बधिर बना बैठा है। यह केवल मूलनिवासियों के विकास के रास्ते पर कांटे बिछाने का कार्य चल रहा है। आपके विकास के दरवाजे एकदम से बंद नहीं किये जा रहे हैं थोड़ी सी झीर्री भी छोड़ी जा रही है ताकि शासन से बगावत न हो सके, इसे राजनीतिक विज्ञान में संरचनात्मक हिंसा भी कहते हैं जो मानव सुरक्षा के अंतर्गत आता है। इसमें उन्हीं नियमों और अधिनियमों का आड़ लेकर आपके संवैधानिक अधिकारों पर ताला लगाया जाता है जिनके द्वारा आप लाभ भी पाते हैं।आंदोलन का उद्देश्य यह बताया जाना था कि प्राधिकृत अधिकारी शासनादेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। वे स्वैच्छिक ढंग से गलत रिपोर्ट लगा रहे हैं जो उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जाति जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के आरक्षण) अधिनियम, 1994 के उपबंध 5 के अंतर्गत कारवाई और दंड का प्रावधान है। इस पर कारवाई होनी चाहिए।जिलाधिकारी लक्षकार यह मार्गदर्शन मांगकर टाइम पास कर रहा था क्योंकि उसे ट्रांसफर जाना था और वह अपनी चमड़ी बचा कर चला गया। नवागत जिलाधिकारी एम पी सिंह इस पत्र को संज्ञान में लेकर समस्त तहसीलदारों को पत्र लिख देंगे की इस पत्र के अनुसार जांच कर विधि अनुरूप प्रमाणपत्र जारी किया जाय।लेकिन यक्ष प्रश्न अभी भी खड़ा है कि क्या शासनादेशों का पालन सुनिश्चित होगा? स्वैच्छाचार बंद होगा?[24/05, 1:46 pm] UMAS.G0ND.PRMHS: उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जिलाधिकारी बलिया को स्पष्टीकरण पत्र संख्या 1304/ 26-3-2025/ 1690967 दिनांक 22 मई 2025 जारी किया गया है। यह स्पष्टीकरण जिलाधिकारी बलिया द्वारा उनके पत्र 806/प्र.पत्र/गोंड/2025 दिनांक 21अप्रैल 2025 द्वारा मार्गदर्शन मांगे जाने पर दिया गया है। यह मार्गदर्शन भी निदेशक अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान लखनऊ के पत्र दिनांक 14/05/2025 के आधार पर दिया गया है।क्या बलिया के जिलाधिकारी/ मुख्य राजस्व अधिकारी/ उपजिलाधिकारी/ तहसीलदारों को उपरोक्त शासनादेशों की जानकारी नहीं थी अथवा इन शासनादेशों की भाषा अस्पष्ट है जो बलिया के जिलाधिकारी ने शासन से मार्गदर्शन मांगा था?115 दिन के संघर्ष का परिणाम यही मार्गदर्शन पत्र है।एक भारतीय प्रशासनिक अधिकारी यदि शासनादेशों की भाषा न समझ पाये, यह भी एक रहस्य बन जाता है। मार्गदर्शन का मांगा जाना अर्थात समस्या जिला प्रशासन में नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश शासन में है और यह स्पष्ट हो जाता है कि समस्या योगी सरकार ने खड़ी कर रखी है और जिला प्रशासन मूक-बधिर बना बैठा है। यह केवल मूलनिवासियों के विकास के रास्ते पर कांटे बिछाने का कार्य चल रहा है। आपके विकास के दरवाजे एकदम से बंद नहीं किये जा रहे हैं थोड़ी सी झीर्री भी छोड़ी जा रही है ताकि शासन से बगावत न हो सके, इसे राजनीतिक विज्ञान में संरचनात्मक हिंसा भी कहते हैं जो मानव सुरक्षा के अंतर्गत आता है। इसमें उन्हीं नियमों और अधिनियमों का आड़ लेकर आपके संवैधानिक अधिकारों पर ताला लगाया जाता है जिनके द्वारा आप लाभ भी पाते हैं।आंदोलन का उद्देश्य यह बताया जाना था कि प्राधिकृत अधिकारी शासनादेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। वे स्वैच्छिक ढंग से गलत रिपोर्ट लगा रहे हैं जो उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जाति जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के आरक्षण) अधिनियम, 1994 के उपबंध 5 के अंतर्गत कारवाई और दंड का प्रावधान है। इस पर कारवाई होनी चाहिए।जिलाधिकारी लक्षकार यह मार्गदर्शन मांगकर टाइम पास कर रहा था क्योंकि उसे ट्रांसफर जाना था और वह अपनी चमड़ी बचा कर चला गया। नवागत जिलाधिकारी एम पी सिंह इस पत्र को संज्ञान में लेकर समस्त तहसीलदारों को पत्र लिख देंगे की इस पत्र के अनुसार जांच कर विधि अनुरूप प्रमाणपत्र जारी किया जाय।लेकिन यक्ष प्रश्न अभी भी खड़ा है कि क्या शासनादेशों का पालन सुनिश्चित होगा? स्वैच्छाचार बंद होगा?
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