काशी दीप विजन वरिष्ठ संवाददाता राजेंद्र गुप्ताा वाराणसी शिक्षण संस्थानों में एनसीसी,एनएसएस,रोवर रेंजर्स का होना हो अनिवार्य- अग्निप्रकाश वाराणसी --वर्तमान में ऑपरेशन सिंदूर के समय देश में नागरिक और सेना की मदद के लिए युवाओं (वॉलिंटियर्स) की जरूरत महसूस हुई। यह कोई पहली दफा नहीं है। इतिहास में जब भी युद्ध हुआ है, तब देश को नागरिक के सहयोग की जरूरत पड़ी। प्रायः युद्ध सेना के साथ नागरिकों के सहयोग से ही जीता जाता है। नागरिक सहयोग से सेना का मनोबल थी ऊंचा होता है। युद्ध का क्षेत्र इतना वृहद और भयंकर होता है कि इससे सेना ही नहीं बल्कि पूरा देश प्रभावित होता है। जिसमे देश की रक्षा में नागरिक की भूमिका उतनी ही बढ़ जाती है, जितनी की सेना की। इसीलिए शांतिकालीन में देश अपने नागरिकों को समय-समय पर सिविल डिफेंस आदि के माध्यम से प्रशिक्षित करता रहता है जिससे आवश्यकता पड़ने पर वह देश के भीतर ही नहीं अपितु सरहद पर भी मदद कर सके। विश्व में इजराइल, उत्तर कोरिया, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड जैसे देशों में तो सभी नागरिकों को सैन्य सेवा अनिवार्य है और आंशिक व कुछ शर्तों के आधार पर ग्रीस,तुर्की, ईरान, ऑस्ट्रिया, नार्वे रूस जैसे मुल्कों में भी सभी नागरिकों को सैन्य सेवा अनिवार्य किया गया है। वर्तमान में राष्ट्र की सुरक्षा और चुनौतियों को देखते हुए यहां यदि सभी नागरिकों को सैन्य सेवा अनिवार्य नहीं किया जाता है तो कम से कम सभी नागरिकों को सिविल डिफेंस आदि का प्रशिक्षण जरूर देना चाहिए। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के बाद केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय द्वारा लगभग 20 लाख युवाओं को सिविल डिफेंस का प्रशिक्षण देकर वॉलिंटियर्स के रूप में तैयार करने की जो पहल की है। उसकी जितनी भी प्रसंशा की जाए कम होगी। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में यह अभियान ऊंट के मुंह में जीरा जैसा लग रहा है। यदि यह अभियान प्रतिवर्ष चलाया जाए तो भी 20 से 30 प्रतिशत लोगों को प्रशिक्षित करने में कई वर्ष तो लगेंगे ही साथ ही सरकारी खर्च का बोझ भी बढ़ेगा।यह अभियान आपातकालीन के लिए सर्वोत्तम है। जबकि शांति काल में सरकार को चाहिए कि माध्यमिक और उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं को एनसीसी, एनएसएस, स्काउट गाइड, रोवर्स, रेंजर्स किसी एक को करना और उसमें प्रशिक्षण लेना अनिवार्य कर देना चाहिए। इन इकाइयों में प्राकृतिक आपदा, युद्ध कालीन समस्याओं आदि से निपटने के लिए आधुनिक और उच्च स्तर का प्रशिक्षण शामिल कर देना चाहिए। आज का युग परमाणु युग होने के कारण कैडेट्स या वालिंटियर्स को परमाणु आपदा से बचने का भी प्रशिक्षण देना अनिवार्य हो गया है। शिक्षण संस्थानों में इस तरह की पहल से हम कम समय और खर्चे में ही हर घर प्रशिक्षित नागरिक बना सकते हैं। ऐसा करना इसलिए भी जरूरी है कि स्वेच्छा से हर घर से लोग प्रशिक्षण में शामिल हों। यह कोई आवश्यक नहीं लेकिन शिक्षण संस्थानों में इसे अनिवार्य कर देने से हर घर को प्रशिक्षित बनाया जा सकता है।
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