वाराणसी। ब्यूरो। नवीन प्रकाश सिंह।ऑनलाइन ठगी करने वाले 29 लोग गिरफ्तार।अमरा चौराहा स्थित जीन पब्लिक स्कूल बिल्डिंग में पिछले कई दिनों से चल रहा था ऑनलाइन ठगी का काम। रोहनिया पुलिस को जब सूचना मिली तो साइबर क्राइम और रोहनिया पुलिस ने संयुक्त घेराबंदी करके उपरोक्त कॉल सेंटर पर छापेमारी कर मौके से कुल 29 अभियुक्तों को आज दिनांक-04.09.2025 को समय करीब 03.10 बजे जीन पब्लिक स्कूल अमरा चौराहा थाना रोहनिया द्वारा गिरफ्तार किया गया। मौके से व जामातलाशी से घटना कारित करने में प्रयुक्त विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भिन्न-भिन्न ब्राण्ड के लैपटॉप, सी०पी०यू०, मॉनीटर, माउस, की-बोर्ड, हेडफोन व मोबाईल फोन व 07 अदद नकली आधार कार्ड बरामद हुए। उक्त गिरफ्तारी व बरादमगी के आधार पर थाना रोहनिया पुलिस द्वारा मु0अ0सं0-0255/2025 धारा 338/336(3)/319(2)/318(4)/61 (2) बी०एन०एस० व 66-डी आई०टी० एक्ट पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है।अपराधियों से जब कड़ाई से पूछा गया तो केंद्र संचालक कौशलेन्द्र तिवारी व अन्य अभियुक्तगणों ने बताया कि हम लोगों द्वारा एक बाहरी कम्पनी से कालिंग पोर्टल खरीद लिया जाता है। जिसपर लॉगिन करने के पश्चात हमें विदेशी नागरिकों के मोबाइल नं० प्राप्त होते हैं। पुनः उसी पोर्टल के माध्यम से हम लोग उन्हीं विदेशी नागरिकों के मोबाइल नम्बरों पर आई०वी०आर० काल जनरेट करते है जो कि अमेजन, फ्लिपकार्ट आदि प्लेटफार्म पर की गयी परचेजिंग व उसके डिलेवरी के कन्फर्मेशन से सम्बन्धित होती है। चूंकि यह आई०वी०आर० काल फर्जी होती है इसलिये विदेशी नागरिक इन प्रोडक्ट को लेने से पहले इन्कार कर देते हैं। फिर हमारे ऑफिस में बैठे डायलर द्वारा इनसे फोन पर वार्ता कर तमाम प्रकार का झांसा जैसे पार्सल में ड्रग्स, चाइल्ड पोर्नोग्राफी कन्टेन्ट आदि दिया जाता है तब जा कर यह लोग हम लोगों के झाँसे में आ जाते हैं। फिर डायलर द्वारा यह काल हमारे ऑफिस में बैठे एक अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर कर दिया जाता है और उसके द्वारा इन विदेशी नागरिकों के बैंक से सम्बन्धित सभी एकाउन्ट आदि की जानकारी ले ली जाती है। पुनः उस व्यक्ति द्वारा यह काल हमारे ही ऑफिस में बैठे तथाकथित लीगल अथॉरिटी क्लोजर के पास ट्रांसफर की जाती है। इस क्लोज़र के द्वारा विदेशी नागरिकों से पुलिस बनकर बात की जाती है एवं तमाम बातों का हवाला देते हुये उनका पैसा बिट कॉइन मशीन व तमाम प्रकार के गिफ्ट कार्ड आदि के माध्यम से पैसों को ले लिया जाता है तथा इन प्राप्त पैसों को विभिन्न प्लेटफॉर्म के माध्यम से हमारे द्वारा अपने पास मंगा लिया जाता है। डायलर को उनको दिये गये लैपटाप में जो स्क्रिप्ट लिखी होती है वह उसी को पढ़कर इन विदेशी नागरिकों से बात करते हैं। हम सभी लोग अपनी पहचान छुपाने हेतु फर्जी आधार कार्ड भी बना रखे हैं, जिससे कोई हम लोगों की सही पहचान न कर सके। साभार।
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