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जमानियां। गर्मी में पशु और पक्षी दोनों के लिए पानी की व्यवस्था करना बहुत जरूरी है। क्योंकि वे निर्जलित होने से बहुत जल्द पीड़ित हो सकते हैं। ऐसे में पालिका द्वारा सभी मोहल्ला के वार्डों में हैंड पंप लगवाया। लेकिन कई सालों से खराब हैंड पंपों की मरम्मत या रिबोर नहीं कराए जाने से कुछ को छोड़ सभी हैंड पंप स्थानीय लोगों के साथ आते जाते राहगीरों के लिए शोपीस बना हुआ है। बताया जाता है। की पालिका द्वारा लगवाई गई हैंड पंप शुद्ध पेयजल देना तो दूर की बात सालों से खराब पड़े हैंड पंप लोगों के लिए शोपीस बना हुआ है। जिसके चलते स्थानीय लोगों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो रहा है। जब की चिलचिलाती धूप में सभी के लिए पीने के लिए पानी इधर उधर भाग दौड़ करने को मजबूर हो चुके है। ऐसे में पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कैसे किया जाए। इस संबंध में शांति एकता कमेटी के सरपरस्त नेसार अहमद खान वारसी ने नगर पालिका परिषद के जिम्मेदारों से कहा है कि गर्मी के मौसम में आते जाते राहगीरों के साथ स्थानीय लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के मद्देनजर खराब पड़े हैंड पंपों की मरम्मत या रिबोर कराना अति आवश्यकता महसूस पड़ रही है। जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों को चाहिए कि भूषण गर्मी को देखते हुए। सभी हैंड पंपों की जल्द से जल्द कराए। ताकि जरूरत मंद इंसानों सहित लू प्रकोप (हीटवेव) से जीव-जंतुओं,पशु पक्षियों, जानवरों को बचाया जा सके। उन्होंने बताया है कि गर्मी बढ़ने लगी हैं। सप्ताह में और अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है। गर्मी में मनुष्य के साथ साथ सभी प्राणियों को पानी की आवश्यकता होती है। जब मनुष्य को प्यास लगती है तो पानी का संग्रहण कर लेता है। अथवा वह कहीं से भी पानी मांगकर या व्यवस्था करके पी लेता है। लेकिन परिंदे व पशुओं को तपती गर्मी में यहां वहां पानी के लिए भटकना पड़ता है। इस लिए गर्मियों में कई परिंदों व पशुओं की मौत पानी की कमी के कारण हो जाती हैं। लोगों को घरों के आस पास उड़ने वाले परिंदों की प्यास बुझाकर उनकी जिंदगी को बचाया जा सकता है। गर्मियों में घरों के आसपास इनकी चहचहाहट बनी रहे इसके लिए जरूरी है। कि लोग पक्षियों से प्रेम करें और उनका विशेष ख्याल रखें। पानी न मिले तो पक्षी बेहोश होकर गिर जाते हैं। और उनकी मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है। परिंदों व पशुओं के लिए गर्मी में पानी को अमृत के समान माना जाता है। और गर्मी में बेजुवान/ मूक पशु पक्षियों को प्यास में तड़पना पड़ता है। हालांकि जब यह प्यासे होते हैं। तो घर के सामने दरवाजे पर आकर खड़े हो जाते हैं। कुछ लोग पानी पिला देते हैं। तो कुछ लोग भगा भी देते हैं। इस गर्मी में पशु पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए लोगों को प्रयास करना चाहिए।खान ने लोगो से अनुरोध किया है। कि घर के बाहर या बालकनी में छांव वाली जगह पर बर्तन में पानी भरकर रखें। पानी गर्म हो जाने पर समय-समय पर उसे बदलते रहे। कोई भी जानवर यदि खाना ना खाए, सुस्त हो या उल्टी करें तो डॉक्टर को दिखाएं। पानी और दाना आदि रख रहे हैं तो नियमित तौर पर इसे बरकरार रखें। ध्यान रहे कि पानी का बर्तन जानवर या पक्षी के आकार के लिहाज से ही हो। जिससे उन्हें पानी पीने में असुविधा ना हो और घरों के बाहर भी पानी के बर्तन भरकर रखें, या बड़ा बर्तन अथवा कोटना में पानी भरकर रखें। जिससे मवेशी व परिंदे पानी देखकर आकर्षित होते हैं। छत पर भी पानी की व्यवस्था करें, छायादार जगह बनाकर वहां पानी के बर्तन भरकर रखें। पक्षियों के लिए चना, चावल, ज्वार, गेहूं आदि जो भी अनाज घर में उपलब्ध हो उसे बेजुबान/पक्षियों हेतु छतों एवं उचित स्थानों पर अवश्य रखें। बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम समाज की पोखरी, तालाब पर दबंगों द्वारा कब्जा कर उसपर आलीशान मकान बना लिया गया है। बावजूद इसके तहसील प्रशासनिक अधिकारी कब्जा लिए गए तालाब, पोखरी को खाली नहीं करा पा रहे है। जिससे पशु पक्षियों के सामने पेयजल की समस्या गहराई हुई है। उन्होंने बताया कि तहसील स्तर पर सर्वे कराई जाए। तो ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम समाज की पोखरी तालाब पर कब्जा पाया जाएगा। लेकिन ईमानदार अधिकारी हाथ नहीं डालना चाहते। मंसूर आलम की रिपोर्ट जमानिया

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