काशी दीप विजन राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्र वाराणसी प्रधान संपादक दीनदयाल सिंह समस्त सगा समाज को सेवा जोहार की हार्दिक शुभकामनाएं [18/11, 7:57 pm] +91 87509 41857: राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस समारोह दिनांक 1 से 13 से 18 नवम्बर 2025 तक उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भव्य विविध कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश भर किए गए। आज समापन समारोह कार्यक्रम में माननीय समाज कल्याण विभाग राज्य मंत्री श्री संजीव कुमार गोंड जी ने संस्थान की सक्रिय भूमिका सचिव/प्रबंधक डॉ. बृजभान मरावी जी को अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण की उपस्थिति में इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में सम्मानित किया गया । इस अवसर पर डॉ. बृजभान जी को हार्दिक शुभकामनाए एवं सेवा जोहार ।[18/11, 10:35 pm] +91 91713 23715: 📌 पूरा समाचार — विस्तृत, संपूर्ण सारांशमुख्य विषय:“जब तक आदिवासी समाज की अपनी राजनीतिक आवाज़ नहीं होगी, तब तक उनका हक़ और अधिकार सुरक्षित नहीं रह पाएँगे।”यह लेख मूल रूप से गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, दादा हीरासिंह मरकाम, और आदिवासी समाज की राजनीतिक व सामाजिक चेतना पर केंद्रित है।---1️⃣ दादा हीरासिंह मरकाम: आदिवासी आंदोलन के प्रमुख स्तम्भदादा मरकाम ने अपना पूरा जीवन आदिवासी समाज के उत्थान, जागरूकता और अधिकारों की लड़ाई में लगाया।उन्होंने गोंडवाना, गोंडी संस्कृति, भाषा, जीवनशैली, परंपराओं और स्वाभिमान को पुनर्जीवित किया।लेख में बताया गया है कि उन्होंने हमेशा यह बात उठाई कि जब तक आदिवासियों की अपनी राजनीतिक पहचान नहीं होगी, तब तक उनके मुद्दों को कोई गंभीरता से नहीं लेगा।---2️⃣ गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का उद्देश्यइस पार्टी का जन्म उन परिस्थितियों से हुआ जब आदिवासी समाज की आवाज़ राष्ट्रीय पार्टियों में दब जाती थी।पार्टी का मुख्य उद्देश्य:√ आदिवासी अधिकारों की रक्षा√ भूमि–जल–जंगल पर प्राकृतिक हक़√ आदिवासी पहचान, संस्कृति और सम्मान को संरक्षित करना√ राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करनालेख कहता है कि राष्ट्रीय दल केवल चुनाव आते ही आदिवासियों को याद करते हैं, पर उनके मुद्दों को स्थायी रूप से नहीं उठाते।---3️⃣ गोंडवाना आंदोलन की गलतफहमियाँ दूर की गईंलेख में बताया गया है कि—कई लोग गोंडवाना आंदोलन को गलत समझते थे, मानते थे कि यह केवल विरोध या बिखराव का प्रयास है।लेकिन दादा मरकाम ने स्पष्ट किया कि गोंडवाना आंदोलन समाज को संगठित करने, उसकी अस्मिता बचाने, और खोई हुई पहचान वापस लाने का प्रयास है।उन्होंने कहा कि गोंडवाना आंदोलन किसी जाति या धर्म के खिलाफ़ नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज की उपेक्षा के खिलाफ़ है।---4️⃣ आदिवासी समाज में राजनीतिक जागरूकता की कमीलेख में यह भी कहा गया—आदिवासी समाज भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत है, पर राजनीतिक रूप से कम संगठित रहा है।इसी वजह से उसका शोषण हुआ, अधिकार छीने गए, जमीनें छिनी, और पहचान कमजोर हुई।जब तक समाज अपनी राजनीतिक शक्ति नहीं बनाएगा, तब तक वह दूसरों पर निर्भर रहेगा।---5️⃣ गोंडवाना आंदोलन का वास्तविक उद्देश्यलेख के अनुसार:आदिवासी समाज को उसकी मूल पहचान वापस दिलाना।गोंडवाना नाम, संस्कृति, भाषा और परंपरा को पुनर्जीवित करना।खोई हुई गौरवशाली इतिहास की धाराओं को फिर से उठाना।समाज में एकता लाना और राजनीतिक प्रतिनिधित्व मजबूत करना।यह आंदोलन केवल चुनाव जीतने का तरीका नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राजनीतिक पुनर्जागरण है।---6️⃣ दादा हीरासिंह मरकाम की सोच: राजनीतिक आवाज़ ही असली शक्तिलेख का मुख्य संदेश है—जब तक आदिवासी समाज की अपनी आवाज़ नहीं होगी,अपने प्रतिनिधि नहीं होंगे,अपनी राजनीतिक शक्ति नहीं होगी—तब तक उनके अधिकार सुरक्षित नहीं रह सकते।---7️⃣ अंत में लेख का निष्कर्षगोंडवाना आंदोलन ने आदिवासी समाज को पहचान, सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई समझाई।दादा मरकाम ने सिखाया कि आदिवासी समाज को अपने अधिकारों के लिए एकजुट, संगठित और राजनीतिक रूप से जागरूक होना पड़ेगा।लेख का अंतिम संदेश:“आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए, अपनी राजनीतिक आवाज़ उठाना अनिवार्य है।”गोंडवाना समग्र विकास क्रांति आंदोलनसम्पूर्ण अखण्ड गोंडवाना लैंड🙏🙏🙏🙏🙏🪚🪚🪚🪚🪚
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