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यह आरोप कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी ने मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला को मजाक बना दिया है।जमानियां। यह आरोप कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी ने मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला को मजाक बना दिया है। कई समाचार रिपोर्टों में सामने आई समस्याओं की ओर इशारा करता है। जहां इन मेलों का आयोजन सिर्फ औपचारिकता के तौर पर किया जा रहा है। और डॉक्टर व कर्मचारी बराबर अनुपस्थित रहते हैं। या मरीजों की ठीक से जांच नहीं करते। यह योजना के उद्देश्य के विपरीत है। जो जरूरतमंदों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। लेकिन अव्यवस्था और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण यह दिखावा बनकर रह जाता है। रविवार 31 अगस्त को जूनियर डाक्टर सचिन कुमार और महिला डाक्टर श्वेता दुबे व अन्य कर्मचारी के बदौलत मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला मजाक बना रहा। प्रसार प्रचार के अभाव तथा तैनात कार्यरत चिकित्सकों में घोर उदासीनता के कारण समस्याएं और कारण लापरवाही और औपचारिकता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी हमेशा की तरह रहा। बताया जाता है। कि 31 अगस्त को भी जन आरोग्य मेला से केंद्र प्रभारी चिकित्सक डाक्टर गुलाब शंकर पटेल अनुपस्थित पाए गए। यहां तक कई डॉक्टर और कर्मचारी भी अनुपस्थित रहे। या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अस्पताल से मरीजों के आने के बाद जल्दी चले जाते हैं। जिससे यह एक औपचारिकता मात्र रह जाता है। अपेक्षाओं का पूरा न होना। इस मेला योजना का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों के लोगों को मुफ्त और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा नहीं हो पाता है। जागरूकता की कमी कभी-कभी लोगों को इन मेलों की जानकारी नहीं होती या आशा कार्यकर्ताओं द्वारा सूचना ठीक से नहीं दी जाती है। जिससे इलाज के लिए पहुंचे मरीज चिकित्सा सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। कर्मचारियों की अनुपस्थिति कुछ मामलों में स्वास्थ्य कर्मचारियों की लापरवाही से भी मेला प्रभावित होता है। लेकिन मुख्यचिकित्साधिकारी कड़ी निगरानी और जवाब देही के लिए तैयार नहीं दिख रहे है। जब की मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले के आयोजन पर कड़ी निगरानी की जानी चाहिए। और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन गाजीपुर सीएमओ लापरवाह चिकित्सकों एवं कर्मचारियों पर कार्यवाही नहीं करना चाहते। इसका क्या वजह हो सकता है। मरीज और अभिभावक सोचने के लिए मजबूर हो चुके है। शासन की योजनाओं के साथ स्वास्थ्य कर्मी और जिम्मेदारों ने खिलवाड़ करने पर आमादा हो चुके है। जबकि आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय समुदायों को मेले के बारे में सही जानकारी रहता है। बशर्ते डाक्टरों की घोर उदासीनता और लापरवाही के खिलाफ विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा कार्यवाही नहीं किया जाना। मरीजों को इसका अधिक से अधिक लोग इसका लाभ नहीं मिल प रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डाक्टरों के उदासीनता और लापरवाही के बारे में सूचना भेजी जाएगी। ताकि योजना का सही क्रियान्वयन होता रहे। भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता और नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के भावी उम्मीदवार नारायण दास चौरसिया, क्षेत्रीय महासभा के युवा जिला अध्यक्ष राजकुमार सिंह, व्यापार मंडल के जिला युवा उपाध्यक्ष मुन्ना गुप्ता, नगर व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष अमन खान गांधी ने बताया कि ऐसे केंद्र प्रभारी से मरीजों को स्वास्थ्य संबंधित लाभ नहीं मिल सकता। इसके बाद भी गाजीपुर सीएमओ भाजपा की सरकार में भाजपा कार्यकर्ताओं के सम्मान में किसी तरह की कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। एक लापरवाह और घोर उदासीनता से ग्रसित केंद्र प्रभारी के खिलाफ कार्यवाही करते हटा नहीं रहे है। उन्होंने बताया कि लापरवाही का आलम ये है। कि रविवार को आयोजित होने वाली मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला से बराबर अनुपस्थित रहना यह घोर उदासीनता को दर्शाता है। ऐसे लापरवाह चिकित्सकों का स्थानांतरण किया जाना मरीजों के हित में होगी। भाजपा पदाधिकारियों ने कहा कि लापरवाह घोर उदासीनता से ग्रसित केंद्र प्रभारी को एक सप्ताह के अंदर हटाने की कार्यवाही नहीं करते है। तो मजबूरन मरीजों एवं अभिभावकों की मांग को पूरा किए जाने को लेकर विशाल आंदोलन चलाने को बाध्य होंगे। जिसकी सारी जिम्मेदारी मुख्यचिकित्साधिकारी पर होगी। महिला डाक्टर श्वेता दुबे, डाक्टर सचिन, मोहित कुमार, हीरालाल आदि उपस्थित रहे। फोटोप्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जमानियां कस्बा में गपशप करते जूनियर डाक्टर प्रसार प्रचार के अभाव में मरीजों का अता पता नहीं रहा। मंसूरी जमानिया

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